केंद्र सरकार ने टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस के लिए पेश किया प्रस्ताव
नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को ‘टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस’ के संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है, ताकि दुर्गम इलाकों में भी लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त हो सके।
इस अधिसूचना में मांग की गई है कि ऐसे दो पहिया वाहन को औपचारिक रूप से मान्यता और नियमन का अधिकार प्रदान किया जाए। इससे ग्रामीण, सुदूर और पहाड़ी इलाकों में लोगों को त्वरित गति से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान हो सकेंगी, क्योंकि ऐसी जगहों पर विशेष रूप से पारंपरिक एंबुलेंस को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य ऐसे वाहनों के लिए एक समर्पित नियामक संरचना के अभाव को दूर करना है, जिन्हें दुर्गम भूभाग, संकरी सड़कों और पारंपरिक एम्बुलेंस के लिए सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए एक प्रभावी समाधान के रूप में तेजी से देखा जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में काफी सुधार कर सकती है और स्वास्थ्य सेवा तक अंतिम मील की पहुंच को सुगम बना सकती है, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में।
वर्तमान में, इन वाहनों को केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता नहीं दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप इनके डिजाइन, सुरक्षा सुविधाओं, पंजीकरण, प्रकार अनुमोदन और फिटनेस निरीक्षण से संबंधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मानकों का अभाव है।
इस अंतर को पाटने के लिए मंत्रालय ने एआईएस-209 (भाग 1):2026 को अपनाने का प्रस्ताव दिया है, जो एक नया मानक है, जो जीवन रक्षक टू-व्हीलर रोड एम्बुलेंस के लिए निर्माण और कार्यात्मक आवश्यकताओं को निर्धारित करता है।
मसौदा ढांचे के तहत, 1 अक्टूबर 2027 को या उसके बाद निर्मित सभी एल2-श्रेणी के टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को एआईएस-209 (भाग 1):2026 के प्रावधानों का अनुपालन करना आवश्यक होगा।
ऐसे वाहनों में लगी आपातकालीन चेतावनी वाली ऊपरी लाइटों को भी उसी तिथि से निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा।
प्रस्तावित नियम राज्य सरकारों को इन एम्बुलेंस के परिचालन क्षेत्रों को निर्धारित करने में लचीलापन प्रदान करते हैं।
राज्यों को स्थानीय आवश्यकताओं और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर यह तय करने का अधिकार होगा कि ऐसे वाहनों को कहां तैनात किया जा सकता है।
मंत्रालय ने टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को परिवहन वाहन के रूप में मानने का भी प्रस्ताव दिया है।
परिणामस्वरूप, उन्हें अनिवार्य फिटनेस प्रमाणन आवश्यकताओं का पालन करना होगा और फिटनेस प्रमाण पत्र को हर दो साल में नवीनीकृत कराना होगा।
--आईएएनएस
एसएचके/डीकेपी
