कर्नाटक में केंद्रीय टीमों ने सूखे का आकलन शुरू किया, फसल का नुकसान 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है: डिप्टी सीएम
बेंगलुरु, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने शनिवार को कहा कि केंद्र की तीन टीमें राज्य में सूखे की स्थिति और फसल के नुकसान का आकलन कर रही हैं। इन तीन केंद्रीय टीमों में कृषि और पर्यावरण मंत्रालयों सहित केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों के अधिकारी शामिल हैं। ये टीमें जमीनी हालात का पता लगाने, फसल के नुकसान का आकलन करने और पानी की उपलब्धता की जांच करने के लिए राज्य के अलग-अलग इलाकों का दौरा करेंगी। उन्होंने फसल का कुल नुकसान का अनुमान 50,000 करोड़ रुपये से 60,000 करोड़ रुपये के बीच लगाया है।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि एक टीम तुमकुरु, चित्रदुर्ग और दावणगेरे इलाके का दौरा करेगी, दूसरी टीम उत्तरी कर्नाटक जाएगी, जबकि तीसरी टीम मैसूरु इलाके का निरीक्षण करेगी। प्रभावित इलाकों का आकलन पूरा होने के बाद राज्य सरकार सूखे से राहत के लिए केंद्र को अंतिम ज्ञापन सौंपेगी।
फील्ड विजिट पर जाने से पहले राज्य सरकार इन टीमों को जानकारी देगी। वे डिप्टी कमिश्नरों और स्थानीय अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे और राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि करेंगे।
परमेश्वर ने कहा कि कर्नाटक ने अपने 240 तालुकों में से 217 को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें से 177 तालुकों में नुकसान का आकलन पहले ही लगभग 46,000 करोड़ रुपये का लगाया जा चुका है, जिसे केंद्र को सौंपे गए दूसरे मेमोरेंडम में शामिल किया गया है।
1 अक्टूबर को सूखाग्रस्त घोषित किए गए बाकी 40 तालुकों में नुकसान का आकलन अभी चल रहा है। परमेश्वर ने कहा कि जब सभी 217 तालुकों का आकलन पूरा हो जाएगा, तो फसल और उससे जुड़े नुकसान की कुल राशि 50,000 करोड़ रुपये से 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
राज्य सरकार ने सूखे से राहत पाने के लिए केंद्र को पहले ही दो ज्ञापन सौंप दिए हैं। दूसरे ज्ञापन में 177 तालुकों को शामिल किया गया था और नुकसान का अनुमान लगभग 46,000 करोड़ रुपये लगाया गया था। सूखे से प्रभावित सभी 217 तालुकों को शामिल करते हुए तीसरा और आखिरी मेमोरेंडम तब सौंपा जाएगा, जब केंद्रीय टीमें अपना आकलन पूरा कर लेंगी और बाकी नुकसान का आकलन फाइनल हो जाएगा।
परमेश्वर ने कहा कि हाल की बारिश का सूखे के आकलन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि बारिश से पीने के पानी की उपलब्धता के मामले में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इससे उन फसलों को कोई खास फायदा नहीं होगा जिन्हें पहले ही नुकसान हो चुका है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय टीमों को मई, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान दर्ज की गई बारिश और सूखे की स्थिति की जानकारी दी जाएगी।
परमेश्वर ने कहा, "सूखे की स्थिति का आकलन सिर्फ हाल की बारिश के आधार पर नहीं किया जाएगा।"
जिन 22 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित नहीं किया गया है, उनके बारे में डिप्टी सीएम ने कहा कि असल स्थिति का पता लगाने के लिए जमीनी स्तर पर जांच (ग्राउंड-ट्रूथिंग) की जाएगी। आकलन के बाद इनमें से कुछ तालुक सूखा-प्रभावित की श्रेणी में आ सकते हैं, जबकि तटीय इलाके के कुछ तालुक जरूरी शर्तों को पूरा नहीं कर पाएंगे।
उन्होंने कहा, "आकलन के दौरान पाई गई असल स्थिति के आधार पर हम कार्रवाई करेंगे।"
इस आरोप पर कि फॉर्म-7 आवेदनों के जरिए योग्य वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, परमेश्वर ने कहा कि सच्चाई का पता लगाने के लिए जांच होनी चाहिए।
उन्होंने भाजपा की इस आलोचना को खारिज कर दिया कि कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर में विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा कि वे वहां आरोपों पर कार्रवाई की मांग करते हुए मेमोरेंडम सौंपने गए थे।
उन्होंने पूछा, "हम चुनाव आयोग को मेमोरेंडम सौंपने गए थे। चूंकि हमें सही जवाब नहीं मिला, इसलिए हम तब तक वहां डटे रहे जब तक उन्होंने जवाब नहीं दिया। हम सरकार चलाने वाले लोग हैं। हम वहां विरोध प्रदर्शन करने क्यों जाएंगे?"
--आईएएनएस
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