कर्नाटक से छोड़े गए पानी से कावेरी उफान पर, पानी की कमी झेल रहे तमिलनाडु के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
कोयंबटूर, 4 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के जलाशयों से अधिक पानी छोड़े जाने और जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण तमिलनाडु में कावेरी नदी के प्रवेश बिंदु बिलिगुंडलू पर जलप्रवाह मंगलवार सुबह बढ़कर 18,000 क्यूसेक पहुंच गया।
पानी के बहाव में अचानक हुई बढ़ोतरी से मेट्टूर बांध में पानी बढ़ने की उम्मीद है। इससे कावेरी डेल्टा के किसानों को बहुत जरूरी राहत मिलेगी, क्योंकि वहां पानी की कमी एक बड़ी चिंता रही है।
अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक के काबिनी और कृष्ण राज सागर जलाशयों से छोड़े गए पानी का बहाव मंगलवार तड़के बिलिगुंड्लु पहुंचना शुरू हो गया।
सोमवार शाम को पानी का बहाव सिर्फ 500 क्यूसेक था, जो मंगलवार तड़के बढ़कर लगभग 1,000 क्यूसेक हो गया। इसके बाद सुबह 7 बजे तक यह तेजी से बढ़कर 8,000 क्यूसेक हो गया और सुबह 10 बजे तक दोगुने से भी ज्यादा होकर 18,000 क्यूसेक तक पहुंच गया।
कावेरी के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के बाद कर्नाटक काबिनी और केआरएस जलाशयों से 27,000 क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ रहा है, इसलिए बहाव के और बढ़ने की उम्मीद है। कर्नाटक से छोड़ा गया पानी कावेरी नदी के जरिए मेट्टूर जलाशय में पहुंचने से पहले बिलिगुंड्लु पहुंचता है। यह जलाशय तमिलनाडु के डेल्टा जिलों में सिंचाई का एक अहम स्रोत है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि बिलिगुंड्लु में दर्ज पानी का नया बहाव मंगलवार शाम या रात तक मेट्टूर बांध तक पहुंच जाएगा, जिससे जलाशय में पानी के बहाव में काफ़ी सुधार होगा।
फिलहाल, मेट्टूर में स्थिति कमजोर बनी हुई है। जलाशय का जलस्तर 73.18 फीट है, जबकि इसकी पूरी क्षमता 120 फीट है। बांध में पानी का बहाव सिर्फ 68 क्यूसेक था, जबकि निचले इलाकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था।
कावेरी का पानी कुछ ही घंटों में जलाशय तक पहुंचने की उम्मीद है, इसलिए अधिकारी बहाव में तेजी और पानी के भंडार में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। कावेरी डेल्टा के किसानों में उम्मीद जगी है, खासकर इसलिए क्योंकि यह इलाका खेती के लिए पानी की अपर्याप्त उपलब्धता की समस्या का सामना कर रहा है।
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश और कर्नाटक के जलाशयों से लगातार पानी छोड़े जाने से आने वाले दिनों में तमिलनाडु में पानी का बहाव और मजबूत हो सकता है। अधिकारी काबिनी और केआरएस से छोड़े जा रहे पानी के साथ-साथ बिलिगुंड्लु और मेट्टूर में दर्ज बहाव पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं।
--आईएएनएस
डीकेएम/वीसी
