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‘नेहरू के विजन को आगे बढ़ाता है ब्रिक्स’, जयराम रमेश ने विस्तारित समूह की तुलना बांडुंग सम्मेलन से की

नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को यहां चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और 1955 में हुए ऐतिहासिक बांडुंग सम्मेलन के बीच समानता बताते हुए कहा कि विस्तारित ब्रिक्स समूह उस सहयोग की भावना को आगे बढ़ाता है, जिसकी नींव भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अन्य एशियाई-अफ्रीकी नेताओं ने रखी थी।
 

नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को यहां चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और 1955 में हुए ऐतिहासिक बांडुंग सम्मेलन के बीच समानता बताते हुए कहा कि विस्तारित ब्रिक्स समूह उस सहयोग की भावना को आगे बढ़ाता है, जिसकी नींव भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अन्य एशियाई-अफ्रीकी नेताओं ने रखी थी।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में नवनिर्मित ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा-पत्र के एक अंश को साझा करते हुए मौजूदा ब्रिक्स सम्मेलन को 1955 के बांडुंग सम्मेलन की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ा। उन्होंने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ मिस्र के गमाल अब्देल नासिर और इंडोनेशिया के सुकर्णो जैसे नेताओं की भूमिका का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि बांडुंग सम्मेलन में एशिया और अफ्रीका के देशों ने पश्चिमी और सोवियत गुटों के बीच प्रतिस्पर्धा से अलग एक स्वतंत्र रास्ता अपनाने की कोशिश की थी। इसी प्रक्रिया ने आगे चलकर गुटनिरपेक्ष आंदोलन को जन्म दिया।

कांग्रेस नेता ने मौजूदा विस्तारित ब्रिक्स को उसी सहयोगी सोच का आधुनिक, अधिक संसाधन-संपन्न और प्रभावशाली रूप बताया, जिसका आधार समानता और पारस्परिक लाभ है।

रमेश ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र के पैराग्राफ 16 को भी साझा किया। इसमें 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में आयोजित एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन को याद करते हुए समानता, स्वतंत्रता, गैर-हस्तक्षेप और पारस्परिक लाभ जैसे सिद्धांतों का उल्लेख किया गया है। घोषणा में कहा गया है कि बांडुंग की भावना अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और प्रतिनिधित्वकारी बहुपक्षीय व्यवस्था की दिशा में प्रयासों के लिए एक संदर्भ बनी हुई है।

जयराम रमेश ने 22 अप्रैल 1955 की दोपहर बांडुंग सम्मेलन के दौरान जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखे गए निजी नोट्स का भी जिक्र किया। उन्होंने इतिहासकार विनीत ठाकुर के हालिया लेख का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें नेहरू के उन नोट्स, डूडल और ऐतिहासिक सम्मेलन के दौरान उनके विचारों का विश्लेषण किया गया है।

रमेश ने अपनी पोस्ट के अंत में 1966 की हिंदी फिल्म ‘मेरा साया’ के लोकप्रिय गीत ‘तू जहां जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा’ का संदर्भ देते हुए बांडुंग की भावना की मौजूदा बहुपक्षीय कूटनीति में निरंतर मौजूदगी पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की।

जयराम रमेश की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व ब्रिक्स को केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह के रूप में नहीं, बल्कि अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के लिए दशकों पुराने प्रयास की अगली कड़ी के रूप में देखता है। उन्होंने नई दिल्ली घोषणा-पत्र को नेहरू के विचारों और बांडुंग सम्मेलन के सिद्धांतों से जोड़कर मौजूदा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को वैश्विक व्यवस्था में अधिक समानता और प्रतिनिधित्व की दिशा में जारी प्रयास के रूप में पेश किया।

--आईएएनएस

डीएससी