कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत खारिज
कोलकाता, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान जेल में ही समय बिताना होगा। इस साल की शुरुआत में सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था।
मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने बोस की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
हालांकि, जस्टिस घोष ने उनकी जमानत अर्जी खारिज करने के फैसले के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई।
बोस कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में लेक टाउन में श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब द्वारा आयोजित कम्युनिटी दुर्गा पूजा के मुख्य संरक्षक थे। अब जमानत खारिज होने के बाद, वह इस साल उस पूजा में शामिल नहीं हो पाएंगे।
इस साल अगस्त में जस्टिस सुव्रा घोष की एक अन्य सिंगल-जज बेंच ने बोस की जमानत अर्जी पर फैसला सुनाने से खुद को अलग कर लिया था, हालांकि उनकी बेंच पर सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी थी।
उनके मुताबिक, पूर्व मंत्री के वकीलों में से एक उनके चैंबर में तब आया था, जब वह वहां नहीं थीं और उन्होंने उनके पर्सनल सेक्रेटरी से उनके चैंबर से केस से जुड़ी फाइल सौंपने को कहा था। जस्टिस सुव्रा घोष ने यह भी कहा कि यह पूरी घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी, और इसलिए उन्होंने इस मामले की जानकारी कलकत्ता हाई कोर्ट के तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती को दी थी।
इसके बाद, उन्होंने मामले से खुद को अलग करने का फैसला किया। इसके बाद, मामला जस्टिस तीर्थंकर घोष की बेंच को भेजा गया और मंगलवार को उन्होंने बोस की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
बोस को इस साल 11 मई को ईडी अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। उन पर साउथ दमदम म्युनिसिपैलिटी में नौकरी चाहने वालों के नामों की गैरकानूनी तरीके से सिफारिश करने का आरोप था।
ईडी ने पहले ट्रायल कोर्ट में दावा किया था कि उस लिस्ट में लगभग 150 नौकरी चाहने वालों के नाम थे, जिनकी सिफारिश पूर्व मंत्री ने की थी।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि भ्रष्टाचार से कमाए गए पैसे बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा किए गए थे।
11 मई को आखिरकार गिरफ्तार किए जाने से पहले ईडी अधिकारियों ने बोस से कई बार पूछताछ की थी।
--आईएएनएस
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