कलकत्ता हाईकोर्ट के जज ने तुलु मंडल मामले में आगे की सुनवाई से खुद को किया अलग
कोलकाता, 25 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से फरार पत्थर खदान मालिक तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन से संबंधित मामले में आगे की सुनवाई से कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने शुक्रवार को खुद को अलग कर लिया।
मंडल की याचिका में पुलिस की जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की मांग की गई है, जिसमें जिला अदालत की ओर से पहले जारी किए गए वारंट के तहत गिरफ्तारी भी शामिल है। अब यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे के कार्यालय को भेजा जाएगा, जो यह तय करेंगे कि इस मामले को किस नई पीठ को सौंपा जाएगा।
इस सप्ताह की शुरुआत में, न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने तुलु मंडल की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें गिरफ्तारी सहित पुलिस की जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की मांग की गई थी।
इसी बीच, मंडल ने न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एक अन्य एकल पीठ के सामने एक समानांतर याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति चंदा ने मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसी मामले से जुड़ा एक केस न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ में चल रही है।
इसके बाद, मामला न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ को वापस भेज दिया गया। शुक्रवार को जब न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई, तो न्यायाधीश ने मामले की आगे की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, क्योंकि वह पहले ही मंडल की अंतरिम सुरक्षा की याचिका को खारिज करने का अपना अंतिम आदेश दे चुके थे।
गौरतलब है कि पुलिस आरोपी तुलु मंडल की 220 करोड़ रुपए की संपत्ति पहले ही जब्त कर चुकी है। हालांकि, जांच अधिकारियों का मानना है कि यह उनकी कुल संपत्ति का एक छोटा सा हिस्सा हो सकता है। पुलिस का दावा है कि 220 करोड़ रुपए नकद और सोने के अलावा, जांचकर्ताओं को लगभग 400 बीघा (यानी लगभग 125 एकड़) जमीन के बारे में जानकारी मिली है, जिस पर कथित तौर पर मंडल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मालिकाना हक है।
जांच टीम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान पत्थर खदान मालिकों की ओर से करोड़ों रुपए के राज्य करों की चोरी करने के लिए कथित तौर पर नकली कार्बन प्रतियों के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी मिली। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार के कुछ अधिकारी, जिन पर टैक्स चोरी की प्रक्रिया में साझीदार के तौर पर काम करने का आरोप है, वे भी जांच अधिकारियों की नजर में हैं।
बीरभूम जिला न्यायालय की ओर से पहले जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट के अलावा तुलु मंडल के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है।
--आईएएनएस
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