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अदालत की अवमानना केस में ममता और अभिषेक बनर्जी से कलकत्ता हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा

कोलकाता, 3 जुलाई (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को उनके खिलाफ पहले से लंबित अदालत की अवमानना के मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
 

कोलकाता, 3 जुलाई (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को उनके खिलाफ पहले से लंबित अदालत की अवमानना के मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

इससे पहले 19 जून को जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस अपूर्बा सिन्हा रॉय की खंडपीठ ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया था। यह मामला तृणमूल कांग्रेस की 21 जुलाई 2025 को मध्य कोलकाता में आयोजित शहीद दिवस रैली से जुड़ा है।

आरोप है कि रैली के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के 2018 के उस आदेश का उल्लंघन हुआ, जिसमें किसी भी राजनीतिक दल को शहर के प्रमुख और व्यस्त सड़क चौराहों को जाम करने या अवरुद्ध करने से रोका गया था।

यह मामला शुक्रवार को जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस अपूर्बा सिन्हा रॉय की उसी खंडपीठ के सामने शुरुआती सुनवाई के लिए आया। इस दौरान अदालत ने ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और मामले से जुड़े सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।

गौरतलब है कि 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट की तत्कालीन खंडपीठ, जिसमें जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य और जस्टिस अरिजीत बनर्जी शामिल थे, ने आदेश दिया था कि शहर में होने वाली कोई भी राजनीतिक रैली किसी भी प्रमुख और व्यस्त चौराहे को जाम या अवरुद्ध नहीं करेगी।

तत्कालीन खंडपीठ ने यह भी आदेश दिया था कि किसी भी रैली या प्रदर्शन के दौरान सड़क का एक हिस्सा हमेशा पैदल यात्रियों और वाहनों की आवाजाही के लिए खुला रखा जाएगा।

तत्कालीन खंडपीठ ने यह भी आदेश दिया था कि एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही किसी भी हाल में बाधित नहीं होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक को दूसरी सड़कों से मोड़ने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि किसी भी ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी मीडिया के जरिए पहले से लोगों तक पहुंचाई जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि अगर किसी राजनीतिक सभा या रैली के दौरान तोड़फोड़, हंगामा या हिंसा होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक और याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि पिछले साल 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली के दौरान 2018 में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का पूरी तरह उल्लंघन किया गया।

याचिका में यह भी दावा किया गया था कि पूर्व सत्ताधारी पार्टी द्वारा शहीद दिवस रैली का आयोजन मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित एक महत्वपूर्ण जंक्शन को पूरी तरह से अवरुद्ध करके किया गया था, जिससे जनता को भारी असुविधा हुई थी।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी