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पुल, सुरंग, एक्सप्रेसवे और बढ़ती रेल सेवाएं देश के परिवहन नेटवर्क में ला रहीं बड़ा बदलाव

नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। भारत का परिवहन नेटवर्क तेजी से बदल रहा है और पुल एवं सुरंगें नए रास्ते खोल रही हैं, जबकि एक्सप्रेसवे और आधुनिक रेल सेवाएं लंबी दूरी की यात्रा के तरीके को नया रूप दे रही हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक सरकारी फैक्टशीट में दी गई।
 

नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। भारत का परिवहन नेटवर्क तेजी से बदल रहा है और पुल एवं सुरंगें नए रास्ते खोल रही हैं, जबकि एक्सप्रेसवे और आधुनिक रेल सेवाएं लंबी दूरी की यात्रा के तरीके को नया रूप दे रही हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक सरकारी फैक्टशीट में दी गई।

फैक्टशीट में कहा गया कि पुल रोजमर्रा की यात्रा में लंबे और धीमे नदी पार करने वाले रास्तों को कम कर रहे हैं और ऐसी यात्राओं को, जिनमें पहले घंटों का समय लगता था, काफी कम समय में पूरा करने में मदद कर रहे हैं।

ब्रह्मपुत्र नदी पर बने रेल-सह-सड़क पुल ने धीमाजी और डिब्रूगढ़ के बीच कनेक्टिविटी को बदल दिया है। फैक्टशीट के अनुसार, जहां पहले यात्रा में लगभग पूरा दिन लग जाता था, वहीं अब इसमें करीब एक से दो घंटे लगते हैं।

मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक मुंबई और नवी मुंबई के बीच सीधा संपर्क उपलब्ध कराता है, जिससे यात्रा का समय घटकर करीब 20 मिनट रह गया है।

कोसी रेल महासेतु ने निर्मली और सरायगढ़ के बीच रेल यात्रा का समय करीब आठ घंटे से घटाकर 30 मिनट कर दिया है, जबकि दूरी लगभग 300 किलोमीटर से घटकर 22 किलोमीटर रह गई है।

इसके अलावा, 200 मीटर लंबे सिसेरी नदी पुल ने पासीघाट और रोइंग के बीच यात्रा का समय करीब पांच घंटे कम कर दिया है। इससे दिबांग घाटी और सियांग के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हुई है।

सुरंगें भारत के कुछ सबसे कठिन इलाकों में सबसे छोटे रास्ते से आवागमन संभव बना रही हैं।

9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग रोहतांग दर्रे को बायपास करती है और मनाली-सर्चू के बीच दूरी 46 किलोमीटर कम कर देती है। इससे लाहौल-स्पीति को हर मौसम में कनेक्टिविटी मिलती है।

9 किलोमीटर लंबी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग कठिन भौगोलिक क्षेत्र को बायपास करती है और यात्रा की दूरी करीब 30 किलोमीटर कम करती है। इससे जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय लगभग दो घंटे कम हो गया है।

अरुणाचल प्रदेश में करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर बनी सेला सुरंग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेजपुर-तवांग मार्ग पर हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती है।

एक्सप्रेसवे छोटे मार्ग, नियंत्रित प्रवेश और अधिक गति के जरिए शहरों के बीच यात्रा की रफ्तार बदल रहे हैं।

82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा का समय करीब ढाई घंटे से घटाकर लगभग 50 मिनट कर दिया है।

213 किलोमीटर लंबा दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय छह घंटे से अधिक से घटाकर करीब ढाई घंटे कर देता है।

दिल्ली-मुंबई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा का समय करीब 33 घंटे से घटाकर लगभग 12 घंटे करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।

इस बीच, वंदे भारत एक्सप्रेस और भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण समय की बचत कर रही हैं।

508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और यह 12 स्टेशनों को जोड़ेगा। इसमें भारत की पहली समुद्र के नीचे बनी रेल सुरंग भी शामिल है, जो ठाणे क्रीक के नीचे करीब 7 किलोमीटर लंबी है। इसकी पहली सेवा अगस्त 2027 में शुरू करने का लक्ष्य है।

फैक्टशीट के अनुसार, केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित सात हाई-स्पीड रेल (एचएसआर) कॉरिडोर लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे होंगे और इनमें अनुमानित 16 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।

--आईएएनएस

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