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केरल: प्रियंका गांधी की पर्यटन पहल और सरकार की योजना से आकार ले रहा 'ब्रांड वायनाड'

तिरुवनंतपुरम, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। वायनाड को एक बेहतर तरीके से प्रबंधित वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान देने की तैयारी है। राज्य सरकार मंगलवार को अपने चर्चित 'ब्रांड वायनाड' प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रही है। वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी भी पिछले कुछ समय से ऐसी पहल की वकालत करती रही हैं।
 

तिरुवनंतपुरम, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। वायनाड को एक बेहतर तरीके से प्रबंधित वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान देने की तैयारी है। राज्य सरकार मंगलवार को अपने चर्चित 'ब्रांड वायनाड' प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रही है। वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी भी पिछले कुछ समय से ऐसी पहल की वकालत करती रही हैं।

प्रियंका गांधी पहाड़ी जिले की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाओं को सामने लाने के लिए व्यापक स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती रही हैं।

पर्यटन मंत्री पीसी विष्णुनाध मंगलवार को वायथिरी विलेज रिजॉर्ट में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी करेंगे।

इस पहल को वीडी सतीशन सरकार के 100 दिवसीय एक्शन प्रोग्राम में शामिल किया गया है।

यह प्रोजेक्ट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका उद्देश्य वायनाड को केवल एक पारंपरिक हिल स्टेशन की पहचान से आगे ले जाना है। इसे प्रकृति, स्थानीय जीवन, कृषि और आदिवासी संस्कृति को जोड़ने वाले एक खास पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

प्रियंका गांधी वायनाड में बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने और पर्यटन स्थल के रूप में जिले का बड़े स्तर पर प्रचार करने की वकालत करती रही हैं।

उनसे पहले वायनाड के सांसद रहे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी कई बार जिले की पर्यटन संभावनाओं पर अधिक ध्यान देने की मांग की थी। उन्होंने पर्यटन के जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया था।

अब सरकार की पहल इस सोच को औपचारिक रूप देने की कोशिश है।

'ब्रांड वायनाड' के केंद्र में जिम्मेदार पर्यटन यानी रेस्पोंसिबल टूरिज्म होगा। इसके तहत होमस्टे को आधुनिक बनाने के साथ वायनाड को एक सुरक्षित और टिकाऊ वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना में केवल दर्शनीय स्थलों को दिखाने के बजाय पर्यटकों को अलग-अलग अनुभव देने पर जोर रहेगा।

इसमें कॉफी के बागान, स्थानीय भोजन, कृषि जीवन, आदिवासी विरासत, ग्रामीण अनुभव और जिले का खास प्राकृतिक वातावरण शामिल होगा।

वायनाड की कॉफी, मसाले, पारंपरिक चावल की किस्मों और शहद को भी पर्यटन के अनुभव से जोड़ा जाएगा। जीआई टैग वाली वायनाड रोबस्टा कॉफी को ‘फार्म-टू-कप’ मॉडल के जरिए वैश्विक स्तर पर प्रमोट किया जाएगा।

एन ऊरू हेरिटेज विलेज का विस्तार किया जाएगा, ताकि वायनाड की मूल आदिवासी संस्कृति को बेहतर तरीके से दुनिया के सामने पेश किया जा सके।

इसके अलावा 50 करोड़ रुपए की लागत से एक ट्राइबल यूनिवर्सिटी और हेरिटेज नॉलेज सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।

सरकार की योजना वायनाड सीएसआर एक्सचेंज शुरू करने, ई-वेस्ट मुक्त अभियान चलाने और जिले के विकास में कॉरपोरेट क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की भी है।

इस योजना में पर्यटन को केवल पहाड़ियों पर ज्यादा पर्यटकों को लाने तक सीमित नहीं रखा गया है। नई सोच के तहत वायनाड के प्राकृतिक नजारे, स्थानीय लोग, उत्पाद, संस्कृति और जीवनशैली को मिलाकर पूरे जिले को एक अलग ‘ब्रांड’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।

सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि 'ब्रांड वायनाड' की यह योजना बेहतर तरीके से प्रबंधित पर्यटन को जमीन पर कितना सफल बना पाती है और इससे वायनाड में रहने वाले स्थानीय लोगों की आमदनी में कितनी बढ़ोतरी होती है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी