पंजाब चुनाव से पहले 'आप' विधायकों के पार्टी में जाने से भाजपा उत्साहित, भगवंत मान अब भी मजबूत चुनौती
नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के कुछ विधायकों के सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन मुद्दों के सहारे भाजपा राज्य में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भी एक प्रमुख दावेदार बनी हुई है।
साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा के साथ दो दशक से अधिक पुराना गठबंधन तोड़ दिया था। दोनों दलों के बीच अलगाव का मुख्य कारण विवादित कृषि कानून थे, जिन्हें बाद में केंद्र सरकार ने वापस ले लिया था। हालांकि, 2022 के चुनाव परिणाम दोनों पार्टियों के लिए निराशाजनक रहे थे।
भले ही अभी भाजपा और अकाली दल के बीच फिर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन ऐसे मजबूत संकेत मिल रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल एक बार फिर साथ आ सकते हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने 2022 का चुनाव बिना किसी गठबंधन के सभी 117 सीटों पर लड़ते हुए रिकॉर्ड 92 सीटें जीती थीं। उस समय सत्तारूढ़ कांग्रेस केवल 18 सीटों पर सिमट गई थी।
पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक सीमित प्रभाव रखने वाली भाजपा ने हाल के वर्षों में स्थानीय नेताओं को अपने साथ जोड़ने पर जोर दिया है। पार्टी खुद को कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, बढ़ते कर्ज और आर्थिक सुस्ती जैसे मुद्दों का समाधान पेश करने वाली ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
इससे पहले आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। अब कुछ विधायकों के भी भाजपा में जाने से राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की भाजपा की कोशिशों को बल मिल सकता है।
हरमीत सिंह पठानमाजरा, चेतन सिंह जौरामाजरा और पूर्व आईपीएस अधिकारी से राजनेता बने कुंवर विजय प्रताप सिंह जैसे नेताओं के भाजपा में जाने को मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के लिए प्रतीकात्मक झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राजनीतिक संदेशों और धारणा की अहम भूमिका होती है।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ नेता आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से असंतुष्ट थे जबकि कुछ ने पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद और शासन व्यवस्था को लेकर चिंताएं जताईं।
ये दलबदल इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि यह उस समय हुआ है जब आम आदमी पार्टी 2022 की बड़ी जीत के बाद अपने कामकाज का बचाव करने की कोशिश कर रही है। पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पंजाब में नशे, गैंगस्टर गतिविधियों, भ्रष्टाचार, वसूली और प्रशासनिक चुनौतियों जैसे मुद्दे उठाए हैं। टिकट वितरण और राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंताएं भी इस फैसले के पीछे बताई जा रही हैं।
जमीनी स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, इस्तीफा देने वाले कम से कम दो विधायक अपने क्षेत्रों में कथित रूप से महत्व कम होने से नाराज थे। कुछ नेताओं के बीच यह धारणा भी है कि आम आदमी पार्टी का संगठनात्मक ढांचा अभी भी काफी केंद्रीकृत है और बड़े फैसलों पर राष्ट्रीय नेतृत्व का प्रभाव अधिक रहता है।
हालांकि केवल तीन विधायकों के जाने से सरकार का बहुमत खतरे में नहीं है लेकिन इससे विपक्ष के उस दावे को बल मिला है कि सत्तारूढ़ दल के अंदर असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी के भीतर के कुछ नेताओं ने भी समय-समय पर शिकायत की है कि स्थानीय मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
पंजाब में नशे की समस्या आज भी सबसे गंभीर मुद्दों में से एक मानी जाती है। नशे की लत, तस्करी के नेटवर्क और ओवरडोज से होने वाली मौतें लगातार चर्चा का विषय बनी रहती हैं। विपक्षी दल सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं कि बार-बार किए गए वादों के बावजूद नशीले पदार्थों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सका है।
दूसरी ओर, पंजाब सरकार अपने 'युद्ध नशियान विरुद्ध' अभियान का हवाला देती है। सरकार का दावा है कि इस अभियान के तहत हजारों गिरफ्तारियां की गई हैं और मादक पदार्थ तस्करों से जुड़ी संपत्तियां जब्त की गई हैं।
पंजाब में युवाओं के बीच बेरोजगारी और विदेश पलायन भी बड़ी चिंता का विषय है। बड़ी संख्या में युवा विदेशों में अवसर तलाश रहे हैं, जिससे कई बार वे संदिग्ध एजेंटों के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे में रोजगार सृजन उन प्रमुख मुद्दों में शामिल है, जिनके आधार पर मतदाता भगवंत मान सरकार का मूल्यांकन कर सकते हैं।
इसके अलावा राज्य पर बढ़ता कर्ज भी गंभीर चिंता का विषय है। अर्थशास्त्री और राजनीतिक विश्लेषक लगातार राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताते रहे हैं। कर्ज के ब्याज और भुगतान पर बढ़ता खर्च विकास योजनाओं को प्रभावित कर रहा है और यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
अन्य लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों में कृषि संकट, लगातार गिरता भूजल स्तर, धीमी औद्योगिक वृद्धि, कानून-व्यवस्था की चुनौतियां और गैंगस्टर गतिविधियां शामिल हैं। ये समस्याएं विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं, जहां से आम आदमी पार्टी को 2022 में भारी समर्थन मिला था।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का तर्क है कि उनकी सरकार ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया है। वह नहर सिंचाई के विस्तार, जल ढांचे में निवेश, अधिकांश घरों को मुफ्त बिजली, बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियों में भर्ती, स्वास्थ्य बीमा योजनाओं, आम आदमी क्लीनिक, शिक्षा सुधार, सड़क निर्माण और नशा विरोधी अभियानों को अपनी उपलब्धियों के रूप में गिनाते हैं।
वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि नशे की समस्या, अपराध, बेरोजगारी और बढ़ते कर्ज को लेकर जनता की चिंता अब भी बनी हुई है। राजनीतिक बहसों से यह संकेत मिलता है कि कई मतदाता सरकार का आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी हालात के आधार पर कर रहे हैं।
इसके बावजूद आम आदमी पार्टी की संगठनात्मक मौजूदगी अभी भी मजबूत मानी जाती है और विधानसभा में उसके पास बहुमत है। सोमवार को हुए दलबदल से भाजपा को कुछ प्रभावशाली स्थानीय चेहरे जरूर मिले हैं, जो भविष्य में उसके चुनाव अभियान को मजबूती दे सकते हैं। हालांकि इससे भाजपा को कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा, इसका फैसला अंततः मतदाता ही करेंगे।
--आईएएनएस
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