‘वोट बैंक बचाने के लिए फिर उठाया हिजाब मुद्दा,' आर. अशोक का कांग्रेस पर हमला
बेंगलुरु, 13 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने बुधवार को कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने 2022 के यूनिफॉर्म आदेश को वापस लेने और स्कूलों-कॉलेजों में हिजाब समेत सीमित पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों की अनुमति देने के फैसले को लेकर सरकार की आलोचना की।
अशोक ने कड़े शब्दों में जारी बयान में आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने दावणगेरे उपचुनाव के बाद और अल्पसंख्यक वोटरों में बढ़ती नाराजगी के चलते तुष्टीकरण रणनीति के तहत हिजाब मुद्दे को फिर से जिंदा किया है।
भाजपा नेता ने इस फैसले को सत्तारूढ़ पार्टी के वोट बैंक को बचाने के लिए किया गया डैमेज कंट्रोल करार देते हुए कहा कि सिद्दारमैया सरकार शासन संबंधी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए विभाजनकारी राजनीति कर रही है।
अशोक ने कहा, ''दावणगेरे उपचुनाव के असर और अल्पसंख्यक वोटरों के बढ़ते गुस्से से घबराई कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर अपनी पुरानी विभाजनकारी राजनीति का सहारा लिया है।''
उन्होंने आरोप लगाया कि जब कर्नाटक महंगाई, भ्रष्टाचार, किसानों की आत्महत्या और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तब सरकार राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों पर ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा, ''यह अधिकारों का मामला नहीं है। यह एक खास समुदाय को खुश करने के लिए सोची-समझी राजनीतिक रिश्वत है, जिसने हाल में अपनी नाराजगी जाहिर की है।
अशोक ने इस मुद्दे पर अदालत के फैसलों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने 2022 के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र किया, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में यूनिफॉर्म ड्रेस कोड को बरकरार रखा गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पुराने आदेश को पलटकर न्यायपालिका के प्रति अवमानना दिखा रही है।
उन्होंने कहा, ''हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि शैक्षणिक संस्थान अनुशासन और समानता के केंद्र होने चाहिए, न कि धार्मिक प्रदर्शन के मंच।''
भाजपा नेता ने कांग्रेस सरकार पर चुनिंदा धर्मनिरपेक्षता अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार हिजाब को स्वतंत्रता के नाम पर अनुमति दे रही है, जबकि भगवा शॉल का विरोध कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की तरह अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है और चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूलों को धार्मिक विभाजन की प्रयोगशाला बनाकर कांग्रेस कुछ अतिरिक्त वोटों के लिए छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।
बता दें कि कर्नाटक सरकार ने 5 फरवरी 2022 के यूनिफॉर्म आदेश को वापस लेते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब, पगड़ी, पवित्र धागा, और रुद्राक्ष जैसे सीमित पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति दी गई है।
--आईएएनएस
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