संसदीय समिति की बैठक में उठाए गए कर्नाटक के आदिवासी कल्याण से जुड़े मुद्दे : गोविंद करजोल
बेंगलुरु, 21 अगस्त (आईएएनएस)। चित्रदुर्ग से भाजपा सांसद और कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री गोविंद एम. करजोल ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति की बैठक में कर्नाटक के आदिवासी समुदायों के कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।
शुक्रवार को करजोल ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधिकारियों का ध्यान वन धन विकास केंद्र, पीएम-जनमन योजना, लंबित राशि जारी करने और वनाधिकार कानून के तहत लंबित आवेदनों की ओर आकर्षित किया।
उन्होंने बताया कि कर्नाटक में 140 वन धन विकास केंद्रों को मंजूरी दी गई है, लेकिन इनमें से केवल 69 केंद्र ही वर्तमान में संचालित हो रहे हैं, जबकि 71 केंद्र अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं।
उन्होंने मंत्रालय से देरी के कारणों की जानकारी मांगी और पूछा कि बाकी केंद्र कब तक चालू किए जाएंगे।
करजोल ने कहा कि कर्नाटक के लिए 20.87 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे, लेकिन अब तक केवल 11.86 करोड़ रुपए ही जारी किए गए हैं। लगभग 9.01 करोड़ रुपए की राशि अभी भी लंबित है। उन्होंने मंत्रालय से लंबित राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि पीएम-जनमन योजना के तहत कर्नाटक के लिए 33 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 21 केंद्र संचालित हो रहे हैं, जबकि 12 केंद्र अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। उन्होंने देरी के कारणों की पहचान कर इन केंद्रों को जल्द शुरू करने की मांग की।
करजोल ने कर्नाटक में संचालित 69 वन धन विकास केंद्रों की जिला-वार प्रदर्शन रिपोर्ट भी मांगी। इसमें लाभार्थियों की संख्या, स्वीकृत और जारी की गई राशि, खर्च की गई धनराशि, केंद्रों की कार्य स्थिति, तैयार किए जा रहे उत्पाद, बिक्री का विवरण और आदिवासी समुदायों की आय संबंधी जानकारी शामिल करने की मांग की।
उन्होंने वनाधिकार अधिनियम के तहत कर्नाटक में बड़ी संख्या में खारिज किए गए आवेदनों पर भी चिंता जताई।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 2,95,176 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2,62,626 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। केवल 16,700 आवेदनों को मंजूरी मिली है और उन्हें अधिकार पत्र जारी किए गए हैं, जबकि 15,850 आवेदन अभी भी लंबित हैं।
करजोल ने इतने बड़े पैमाने पर आवेदनों को खारिज किए जाने के कारणों पर सवाल उठाया। उन्होंने लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा नहीं होने की वजह भी पूछी। साथ ही मंत्रालय से यह जानकारी मांगी कि लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने जिला-वार आंकड़े भी मांगे, जिनमें प्राप्त, स्वीकृत, अस्वीकृत और लंबित आवेदनों के साथ-साथ वितरित किए गए वनाधिकार पट्टों का विवरण शामिल हो।
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने करजोल को आश्वासन दिया कि उनके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई जल्द की जाएगी।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम
