तमिलनाडु भाजपा प्रमुख नागेंद्रन को 3.99 करोड़ रुपए नकद जब्ती मामले में आरोपपत्र प्राप्त हुआ
चेन्नई, 16 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन गुरुवार को चेन्नई के जॉर्ज टाउन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों से जुड़े कथित 3.99 करोड़ रुपए के नकद जब्ती मामले में दायर आरोपपत्र की प्रति सौंपी गई।
अदालत ने मामले की सुनवाई 30 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी और सभी आरोपियों को अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दिया।
यह मामला 6 अप्रैल, 2024 को हुई एक बड़ी नकद जब्ती से संबंधित है, जब चुनाव आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड के अधिकारियों ने तांबरम रेलवे स्टेशन पर नेल्लाई एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे तीन लोगों को रोका था। जांच के दौरान, अधिकारियों ने यात्रियों से 3.99 करोड़ नकद बरामद किए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर अधिकारियों को बताया कि यह पैसा संसदीय चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को वितरित करने के लिए तिरुनेलवेली ले जाया जा रहा था और वे नागेंद्रन के निर्देशों पर काम कर रहे थे। नागेंद्रन उस समय तिरुनेलवेली लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार थे।
नकदी जब्त होने के बाद, फ्लाइंग स्क्वाड ने तांबरम पुलिस को सूचित किया, जिन्होंने आपराधिक मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक एस. सतीश, नागेंद्रन के स्वामित्व वाले व्यवसाय, पुरासवाल्कम स्थित ब्लू डायमंड होटल में प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे और भाजपा से भी जुड़े थे।
अन्य दो आरोपियों की पहचान एस. नवीन और एस. पेरुमल के रूप में हुई। आयकर विभाग को सूचित करने के बाद जब्त की गई नकदी को संबंधित तहसीलदार को सौंप दिया गया।
कुछ सप्ताह बाद, विस्तृत जांच के लिए मामले को अपराध शाखा-आपराधिक जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) को सौंप दिया गया।
अपनी जांच पूरी करने के बाद, सीबी-सीआईडी ने नागेंद्रन और भाजपा के पूर्व संगठनात्मक सचिव केशवा विनयगम सहित 13 लोगों के खिलाफ इस मामले में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए आरोपपत्र दायर किया।
गुरुवार को अन्य आरोपियों के साथ मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होते हुए नागेंद्रन ने आरोपपत्र की प्रति स्वीकार कर ली, जिसके बाद अदालत ने आगे की कार्यवाही के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की।
अदालत के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए नागेंद्रन ने कहा कि आरोप निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला पिछली डीएमके सरकार के दौरान राजनीतिक इरादे से दर्ज किया गया था और कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि वर्तमान सरकार कार्यवाही वापस ले लेगी।
हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है और उन्होंने दोहराया कि वे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से इस मामले को लड़ेंगे।
--आईएएनएस
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