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अमेरिका ने बायोटेक वर्कफोर्स आकलन के लिए विधेयक पेश किया, चीन से प्रतिस्पर्धा पर फोकस

वाशिंगटन, 22 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के दो लॉमेकर्स (एक रिपब्लिकन और एक डेमोक्रेट) ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव का मकसद यह पता लगाना है कि अमेरिका के पास बायोटेक्नोलॉजी (जैव प्रौद्योगिकी) के क्षेत्र में काम करने के लिए पर्याप्त कुशल लोग हैं या नहीं। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि अमेरिका अब भविष्य की जरूरी तकनीकों के मामले में चीन के साथ अपनी प्रतिस्पर्धा को और मजबूत कर रहा है।
 
अमेरिका ने बायोटेक वर्कफोर्स आकलन के लिए विधेयक पेश किया, चीन से प्रतिस्पर्धा पर फोकस

वाशिंगटन, 22 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के दो लॉमेकर्स (एक रिपब्लिकन और एक डेमोक्रेट) ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव का मकसद यह पता लगाना है कि अमेरिका के पास बायोटेक्नोलॉजी (जैव प्रौद्योगिकी) के क्षेत्र में काम करने के लिए पर्याप्त कुशल लोग हैं या नहीं। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि अमेरिका अब भविष्य की जरूरी तकनीकों के मामले में चीन के साथ अपनी प्रतिस्पर्धा को और मजबूत कर रहा है।

भारतीय-अमेरिकी लॉमेकर रो खन्ना और प्रतिनिधि रिच मैककॉर्मिक ने गुरुवार को मिलकर 'फेडरल बायोटेक्नोलॉजी वर्कफोर्स असेसमेंट एक्ट' नाम का बिल पेश किया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या अमेरिकी सरकार के पास बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर को तेजी से बढ़ाने के लिए पर्याप्त और कुशल लोग मौजूद हैं या नहीं।

इस कानून के तहत ऑफिस ऑफ पर्सनेल मैनेजमेंट एंड बजट विभाग को दूसरे सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर यह तय करना होगा कि 'बायो-लिटरेट' यानी बायोलॉजी और बायोटेक समझने वाले कर्मचारियों की परिभाषा क्या है और अभी और भविष्य में कितने लोगों की जरूरत पड़ेगी।

इन सांसदों के अनुसार, इसके बाद एक रिपोर्ट बनाई जाएगी और उसे कांग्रेस को सौंपा जाएगा। इस रिपोर्ट की मदद से आगे चलकर भर्ती और ट्रेनिंग की नीतियां बनाई जाएंगी, जो बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी होंगी।

यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब वाशिंगटन में यह चिंता बढ़ रही है कि अमेरिका कहीं चीन से बायोटेक, एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में पीछे न रह जाए।

दोनों लॉमेकर्स ने कहा कि यह प्रस्ताव अप्रैल 2025 में नेशनल सिक्योरिटी कमीशन ऑन इमर्जिंग बायोटेक्नोलॉजी (एनएससीईबी) की एक रिपोर्ट के बाद आया है। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर अमेरिका को इन उभरती तकनीकों में आगे रहना है, तो सरकार के पास अच्छी तरह प्रशिक्षित बायोटेक वर्कफोर्स होना बहुत जरूरी है।

यह बिल, रिच मैककॉर्मिक के 'बायोटेक्नोलॉजी वर्कफोर्स अलाइनमेंट एक्ट' के साथ मिलकर एक बड़े पैकेज का हिस्सा है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि कहां-कहां पर लोगों की कमी है और सरकारी रिसर्च की प्राथमिकताओं को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से जोड़ना है।

रो खन्ना ने कहा क‍ि अमेरिका की बायोटेक वर्कफोर्स में निवेश करने से देश को आर्थिक और वैज्ञानिक नेतृत्व हासिल करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि वे इस बिल को रिच मैककॉर्मिक के साथ मिलकर पेश कर रहे हैं, ताकि अमेरिका यह सुनिश्चित कर सके कि वह बायोटेक्नोलॉजी में चीन से आगे रह सके। चाहे वह खोज, नवाचार हो या उद्यमिता।

मैककॉर्मिक ने इसे आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा क‍ि अमेरिका बायोटेक्नोलॉजी में दुनिया में आगे है और हमें इसे बनाए रखना है।

उन्होंने कहा कि अभी सरकार बायोटेक रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग में बड़े निवेश कर रही है, लेकिन सही टैलेंट और लोगों की कमी के कारण पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

उनके मुताबिक, यह कानून इस कमी को दूर करेगा और एक साफ तस्वीर देगा कि कहां पर सुधार की जरूरत है, ताकि अमेरिका आगे भी दुनिया में नेतृत्व करता रहे।

सांसदों ने यह भी बताया कि बायोटेक्नोलॉजी वर्कफोर्स सिर्फ लैब में काम करने वाले वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं है।

एनएससीईबी के कमिश्नर पॉल अर्कांगेली ने इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति' बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून अमेरिका को वैज्ञानिक नवाचार, एआई आधारित रिसर्च और उन्नत बायो मैन्युफैक्चरिंग में आगे बनाए रखने में मदद करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में सिर्फ लाइफ साइंटिस्ट ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल टेक्नीशियन, मैकेनिक, पाइपफिटर और दूसरे कुशल कामगार भी शामिल होते हैं, जो भविष्य की बायोटेक इंडस्ट्री को चलाएंगे।

--आईएएनएस

एवाई/एएस