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बिहार में अवैध रेत और पत्थर खनन माफियों पर कार्रवाई तेज हुई

पटना, 5 जनवरी (आईएएनएस)। बिहार सरकार ने अवैध रेत और पत्थर खनन के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। बिहार सरकार ने अवैध खनन माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए पिछले साल दिसंबर में राज्यव्यापी व्यापक अभियान की शुरुआत की।
 
बिहार में अवैध रेत और पत्थर खनन माफियों पर कार्रवाई तेज हुई

पटना, 5 जनवरी (आईएएनएस)। बिहार सरकार ने अवैध रेत और पत्थर खनन के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। बिहार सरकार ने अवैध खनन माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए पिछले साल दिसंबर में राज्यव्यापी व्यापक अभियान की शुरुआत की।

एक महीने तक चले इस अभियान के दौरान, खान और भूविज्ञान विभाग ने राज्य भर में 4,582 स्थानों पर अवैध खनन, परिवहन और भंडारण गतिविधियों के खिलाफ छापेमारी की।

इस कार्रवाई के तहत, अधिकारियों ने 574 वाहन जब्त किए, 248 एफआईआर दर्ज कीं, और कई गिरफ्तारियां कीं, जिससे खनन माफिया को बड़ा झटका लगा।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, औरंगाबाद जिले में सबसे अधिक छापेमारी (331) दर्ज की गई, जबकि पटना जिले में अवैध खनन से संबंधित मामलों में सबसे अधिक गिरफ्तारियां (15) हुईं।

मगध मंडल में फल्गु नदी, शाहबाद में सोन नदी और पटना में गंगा नदी में रेत खनन बड़े पैमाने पर हो रहा है। इन नदियों के अलावा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, परमान, कमला बालन और अन्य नदियों में भी खनन होता है।

औरंगाबाद, गया, रोहतास और कैमूर के पहाड़ों में पत्थरों का खनन लगातार होता रहता है।

अधिकारियों ने जोर दिया कि यह अभियान अवैध खनन के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का एक दृढ़ प्रयास है।

उपमुख्यमंत्री और खान एवं भूविज्ञान मंत्री विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में नियमित निगरानी और कड़ी समीक्षाओं का प्रभाव विभाग के राजस्व प्रदर्शन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

दिसंबर 2025 तक, विभाग ने अपने वार्षिक राजस्व लक्ष्य का 102 प्रतिशत हासिल कर लिया, जो उम्मीदों से कहीं अधिक है।

अधिकारियों ने इस उपलब्धि का श्रेय अवैध खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने और कानूनी खनन कार्यों को बढ़ावा देने को दिया।

विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन क्षेत्रों में अवैध खनन की बार-बार शिकायतें प्राप्त होती हैं, वहां जांच का दायरा खनन संचालकों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित प्रशासनिक इकाइयों की जिम्मेदारी भी इसमें शामिल होगी।

सभी जिलों के खनन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक शिकायत पर त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करें।

राज्य सरकार का मानना ​​है कि वैध और संगठित खनन को प्रोत्साहित करने से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे, जिससे सतत आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।

--आईएएनएस

एमएस/