एसआईआर विवाद: बिहार में कांग्रेस और आरजेडी का सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन
पटना, 25 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार कांग्रेस और आरजेडी ने शुक्रवार को पटना में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
राज्य चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
विरोध प्रदर्शन आर-ब्लॉक से राज्य चुनाव आयोग कार्यालय तक आयोजित किया गया था। बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में भाग लिया और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
बिहार कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों से जुड़ा है।
राजेश राम ने कहा, “चुनाव आयोग के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन इसलिए हो रहा है, क्योंकि राहुल गांधी लगातार उनका पर्दाफाश कर रहे हैं। आज यह साबित हो गया है कि बिहार, हरियाणा और महाराष्ट्र में सरकारें वोटों की चोरी के जरिए बनी हैं। चुनाव आयोग ने अभी तक राहुल गांधी को कोई जवाब नहीं दिया है।”
ये आरोप कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक स्थिति को दर्शाते हैं और इन्हें चुनाव आयोग या किसी अदालत द्वारा तथ्यों के रूप में साबित नहीं किया गया है।
प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ गया। इस बीच कांग्रेस कार्यकर्ता और पुलिसकर्मी आमने-सामने आ गए। कुछ प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला लेकर बैरिकेड्स पर चढ़ गए, जिससे घटनास्थल पर हंगामा मच गया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तार करने की मांग भी की। देशव्यापी कांग्रेस विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी चुनाव आयोग की आलोचना की। उन्होंने ने कहा, “उन्होंने बंगाल, बिहार और असम के 13 करोड़ लोगों के साथ अन्याय किया है। उन्हें यूं ही कैसे छूट दी जा सकती है?”
महागठबंधन के प्रमुख घटक दल आरजेडी ने भी इस मुद्दे पर पटना में प्रदर्शन किया। आरजेडी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए, खासकर एसआईआर और चुनावी प्रक्रिया को लेकर।
बिहार में ये विरोध प्रदर्शन विपक्षी दलों द्वारा चलाए जा रहे एक व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा हैं, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के प्रबंधन और विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ये विरोध प्रदर्शन एक रिपोर्ट सामने आने के बाद हो रहे हैं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव आयोग के निर्णयों और प्रक्रियाओं के संबंध में 10 महीनों की अवधि में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने, नाम बहाल करने, प्रपत्र 6 में बदलाव, नए मतदाता और मतदाता सूची के आंकड़ों के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ आपत्तियां उन निर्णयों से संबंधित थीं, जिनके बारे में दोनों आयुक्तों ने कहा कि वे उनकी जानकारी या अनुमोदन के बिना लिए गए थे। आपत्तियों में मतदाता सूची डेटाबेस नियंत्रण के केंद्रीकरण और एसआईआर प्रक्रिया के पहलुओं से संबंधित चिंताएं शामिल थीं।
चुनाव आयोग ने इस सुझाव को खारिज कर दिया है कि रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियां तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर आम सहमति की कमी को दर्शाती हैं।
आयोग के अनुसार, एसआईआर से संबंधित निर्णयों सहित उसके द्वारा लिए गए सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की स्वीकृति से लिए गए थे और सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। आयोग ने कहा कि निर्णयों और स्वीकृतियों के व्यापक समूह पर विचार किए बिना व्यक्तिगत आंतरिक टिप्पणियों को उजागर करना उसकी निर्णय प्रक्रिया का केवल एक हिस्सा प्रस्तुत करता है।
चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूचियों के एसआईआर को लेकर विवाद जारी है, विपक्षी दल जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसके निर्णय स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार लिए गए हैं।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
