मानव-वन्यजीव संघर्ष बड़ी चुनौती, गैंडा और डॉल्फिन समेत चार नए संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी: भूपेंद्र यादव
नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत के सामने संरक्षण और विकास से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित समाधान अपनाने पर जोर दिया।
तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन करने के बाद भूपेंद्र यादव ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए समस्या आधारित नहीं, बल्कि समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने देशभर के वन विभागों से मानव बस्तियों और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सक्रिय और प्रभावी कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय बनाकर इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए नवाचार आधारित मॉडल विकसित किए जाएं और उन्हें व्यापक स्तर पर लागू किया जाए। उन्होंने कहा, "संघर्ष नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और सामंजस्य ही पारिस्थितिकीय स्थिरता का मूल मंत्र होना चाहिए।"
इस अवसर पर भूपेंद्र यादव ने राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म देशभर में मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े आंकड़ों के प्रबंधन, जानकारी साझा करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
साथ ही 'भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन' शीर्षक से प्रकाशनों की श्रृंखला का पहला संस्करण भी जारी किया गया। इसमें देश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की मौजूदा स्थिति, रुझानों और उभरती चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भूपेंद्र यादव ने राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (National CAMPA) की संचालन समिति की सातवीं बैठक की भी अध्यक्षता की।
बैठक में वन संरक्षण, प्रतिपूरक वनीकरण और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से कई प्रस्तावों पर विचार किया गया। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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