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भोपाल में ईडी की कार्रवाई, विवाह सहायता योजना घोटाले में 5.37 करोड़ की संपत्ति जब्त

भोपाल, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश की सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की 5.37 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है।
 

भोपाल, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश की सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की 5.37 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है।

एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि यह कार्रवाई 2019 से 2021 के बीच एक सरकारी विवाह सहायता योजना से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में की गई है।

ईडी के एक अधिकारी ने एक बयान में बताया कि ईडी के भोपाल जोनल ऑफिस ने सीईओ शोभित त्रिपाठी और उनके सहयोगी हेमंत साहू की 5.37 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने का आदेश जारी किया है। इससे पहले की गई तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज बरामद हुए थे, जो अपराध से जुड़े हो सकते हैं।

ईडी ने बताया कि त्रिपाठी को 2 सितंबर को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया था और वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं।

ईडी के अनुसार, संपत्तियों को जब्त करने का यह आदेश पीएमएलए, 2002 के तहत जारी किया गया है। यह कार्रवाई 'विवाह सहायता योजना' के तहत सरकारी फंड के फर्जी वितरण से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई है।

ईडी ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने 'विवाह सहायता योजना' शुरू की थी, जिसका मकसद पंजीकृत गरीब निर्माण श्रमिकों की महिलाओं को 51,000 रुपए की आर्थिक सहायता देना था।

आरोप है कि 2019 से नवंबर 2021 तक सिरोंज जनपद पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर रहते हुए त्रिपाठी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर 5,923 संदिग्ध विवाह सहायता मामलों में 30.18 करोड़ रुपए का सरकारी फंड मंजूर किया और उसे जारी कर दिया।

ईडी की यह जांच भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा त्रिपाठी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह एफआईआर आईपीसी, 1860 की धारा 420, 409 और 120-बी तथा 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट', 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दर्ज की गई थी।

ईडी ने बताया कि जांच में पता चला है कि इस योजना का लाभ गलत तरीके से उठाने के लिए अपात्र लाभार्थियों के फर्जी आवेदन फॉर्म और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था।

ईडी ने आगे बताया कि अपात्र लाभार्थियों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उनके नाम पर बैंक खाते खोले गए थे, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। इन खातों का मकसद केवल योजना के फंड को इनमें ट्रांसफर करना था और बाद में इस पैसे को तुरंत कई बार में नकद निकाल लिया गया।

केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब सार्वजनिक रूप से शादियां करने पर रोक थी, तब ऐसे लोगों को भी लाभ दिए गए, जो इसके पात्र नहीं थे।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी