तमिलनाडु सरकार का फैसला, भवानीसागर बांध से 15 दिन के लिए छोड़ा जाएगा पानी
इरोड, 16 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने किसानों को बड़ी रहत देते हुए भवानीसागर बांध से लोअर भवानी परियोजना (एलबीपी) नहर प्रणाली में 15 दिनों तक पानी छोड़ने का आदेश दिया है। इस फैसले से उन किसानों को राहत मिली है, जो सिंचाई के लिए तत्काल जल आपूर्ति की मांग कर रहे थे।
आमतौर पर हर साल 15 अगस्त को लोअर भवानी नहर से जुड़े क्षेत्रों में खेती के लिए भवानीसागर बांध से पानी छोड़ा जाता है। हालांकि इस वर्ष बांध का जलस्तर 60 फीट से नीचे रहने और जलप्रवाह कम होने के कारण अनिश्चितता बनी हुई थी।
राज्य सरकार ने शनिवार देर रात तक सिंचाई के लिए पानी छोड़ने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया था, जिससे इरोड जिले के किसानों की चिंता बढ़ गई थी। किसानों का कहना था कि अधिक देरी होने पर खड़ी फसलों और आगामी कृषि कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पानी छोड़ने की मांग को लेकर लोअर भवानी सिंचाई प्रणाली पर निर्भर किसानों ने इरोड के पास धरना भी दिया। उन्होंने जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में फसलों को बचाने के लिए कम से कम सीमित मात्रा में पानी उपलब्ध कराने की मांग की।
किसानों के विरोध और ज्ञापनों के बाद इरोड के जिला कलेक्टर कंदासामी ने विशेष सिंचाई व्यवस्था की घोषणा की। कलेक्टर द्वारा जारी बयान के अनुसार, जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के आधार पर भवानीसागर बांध से 15 दिनों तक पानी छोड़ा जाएगा।
इससे लगभग 1,300 एकड़ कृषि भूमि को लाभ मिलने की उम्मीद है। पानी लोअर भवानी मुख्य नहर और चेन्नासमुद्रम वितरण नहर के विषम संख्या वाले स्लूइस गेटों से छोड़ा जाएगा। बांध में कम जल भंडारण को देखते हुए अधिकारियों को जल प्रवाह का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्लूइस गेट पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने वाला एक विशेष गेट होता है, जिसे बांध, नहर, जलाशय या नदी में लगाया जाता है।
हालांकि इस घोषणा से किसानों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन खेती के बाकी सीजन में पानी की उपलब्धता को लेकर उनकी चिंता बनी हुई है। किसानों ने मांग की है कि जल वितरण की निगरानी की जाए ताकि पानी नहर के अंतिम छोर तक पहुंचे और बीच में उसकी बर्बादी या डायवर्जन न हो।
भवानीसागर बांध इरोड और आसपास के जिलों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। इसके जलस्तर में किसी भी तरह की कमी का सीधा असर लोअर भवानी नहर नेटवर्क पर निर्भर हजारों किसान परिवारों पर पड़ता है।
अधिकारियों ने किसानों से उपलब्ध पानी का सोच-समझकर उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में पानी छोड़े जाने का फैसला जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश और बांध में आने वाले जल प्रवाह पर निर्भर करेगा।
--आईएएनएस
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