दिल्ली में चल रहे 'भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026' का समय 5 अप्रैल तक बढ़ाया गया
नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने दिल्ली के सुंदर नर्सरी में चल रहे 'भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026' का समय 5 अप्रैल तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
एक बयान में कहा गया है कि 29 मार्च को जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके सतत आजीविका और लघु वन उपज के मूल्यवर्धन पर चर्चा के लिए वन धन कॉन्क्लेव का उद्घाटन करेंगे।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जनहित मंत्रालय द्वारा टीआरआईएफईडी (ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) के सहयोग से आयोजित गतिविधियों में भारी जनभागीदारी और बढ़ती मांग को देखते हुए महोत्सव की अवधि बढ़ाने की घोषणा की गई है।
मूल योजना के अनुसार, महोत्सव 30 मार्च को समाप्त होना था।
बयान में आगे कहा गया कि यह निर्णय आगंतुकों, हितधारकों और प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया को दर्शाता है और इसका उद्देश्य देश भर के आदिवासी कारीगरों, उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए बाजार पहुंच और आजीविका के अवसरों को और मजबूत करना है। यह महोत्सव भारत की समृद्ध आदिवासी विरासत को प्रदर्शित करने वाले एक मंच के रूप में उभरा है, जिसमें पारंपरिक शिल्प, हथकरघा, व्यंजन और उद्यम शामिल हैं।
बयान में आगे कहा गया है कि इस आयोजन में भारी भीड़ देखी गई है, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 1,000 से अधिक आदिवासी कारीगरों, वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके), आदिवासी रसोइयों और सांस्कृतिक मंडलों ने भाग लिया है।
इस महोत्सव में 22 राज्यों के 78 वीडीवीके, 28 राज्यों के 300 से अधिक कला और शिल्प प्रदर्शक और 21 राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले 30 फूड स्टॉलों का संचालन करने वाले 120 आदिवासी व्यंजन प्रतिभागी शामिल हैं।
बयान में कहा गया कि इस विस्तार से कारीगरों और उत्पादकों को उपभोक्ताओं के साथ सीधा संपर्क बनाए रखने में मदद मिलेगी, जिससे आदिवासी उत्पादों की बेहतर कीमत और व्यापक दृश्यता सुनिश्चित होगी। इससे आगंतुकों को आदिवासी भारत की विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का अनुभव करने का भी अधिक अवसर मिलेगा।
प्रदर्शनियों और बिक्री के साथ-साथ, महोत्सव में भारत ट्राइब्स बिजनेस कॉन्क्लेव, सीएसआर कॉन्क्लेव और विषयगत कार्यशालाओं जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते रहेंगे, जो ज्ञान के आदान-प्रदान, साझेदारी और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देते हैं।
--आईएएनएस
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