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पश्चिम बंगाल: हिंसा के बाद चुनाव आयोग का एक्शन, पुलिस अधिकारी को सस्पेंड करने का निर्देश

कोलकाता, 27 मार्च (आईएएनएस)। कोलकाता में चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला को निर्देश दिया कि वे दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज अविजित पॉल को तुरंत निलंबित करें। यह कार्रवाई 26 मार्च को इलाके में हुई हिंसा और झड़पों के मामले में की गई है।
 
पश्चिम बंगाल: हिंसा के बाद चुनाव आयोग का एक्शन, पुलिस अधिकारी को सस्पेंड करने का निर्देश

कोलकाता, 27 मार्च (आईएएनएस)। कोलकाता में चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला को निर्देश दिया कि वे दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज अविजित पॉल को तुरंत निलंबित करें। यह कार्रवाई 26 मार्च को इलाके में हुई हिंसा और झड़पों के मामले में की गई है।

एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर को भी कुछ बदमाशों के समूह ने पीटा, जिनका संबंध कथित तौर पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से बताया जा रहा है।

चुनाव आयोग के अंडर सेक्रेटरी शक्ति शर्मा द्वारा मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि पुलिस को पहले से जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई।

पत्र में यह भी कहा गया कि पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल उपलब्ध थे, लेकिन इंस्पेक्टर-इन-चार्ज अविजित पॉल ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनकी मांग नहीं की। चुनाव आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही और कर्तव्य में चूक माना।

आयोग ने निर्देश दिया कि अविजीत पॉल को तुरंत निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। उनकी जगह अब पश्चिम बंगाल पुलिस की एन्फोर्समेंट ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रबीर घोष को नियुक्त किया गया है।

मुख्य सचिव को यह भी निर्देश दिया गया कि वे इस आदेश को तुरंत लागू करें और शुक्रवार रात 9 बजे तक रिपोर्ट आयोग को भेजें।

इससे पहले, भाजपा के आईटी सेल प्रमुख और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि गुरुवार को बसंती में हुई हिंसा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान के बाद भड़की।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर में रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं से “घर में जो भी हो, उससे लैस होने” की अपील की, जिसके कुछ ही मिनट बाद बसंती में तनाव शुरू हो गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस प्रशासन हिंसा के दौरान मूकदर्शक बना रहा।

--आईएएनएस

एएमटी/डीएससी