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1993 बोवबाजार बम ब्लास्ट: दोषी रशीद खान की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची पश्चिम बंगाल सरकार

नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 1993 के बोवबाजार बम विस्फोट मामले के आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी मोहम्मद रशीद खान को रिहा करने और सजा में छूट देने का निर्देश दिया गया था।
 
1993 बोवबाजार बम ब्लास्ट: दोषी रशीद खान की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची पश्चिम बंगाल सरकार

नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 1993 के बोवबाजार बम विस्फोट मामले के आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी मोहम्मद रशीद खान को रिहा करने और सजा में छूट देने का निर्देश दिया गया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष मामले का उल्लेख कर राज्य सरकार ने जल्द सुनवाई की मांग की। राज्य सरकार की दलील सुनने के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने आश्वासन दिया कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर शीघ्र सुनवाई के लिए विचार किया जाएगा।

याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के 5 जून के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने मोहम्मद रशीद खान को रिहाई का हकदार माना था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि मोहम्मद रशीद खान 33 वर्षों से अधिक समय से जेल में हैं और उनके आचरण को देखते हुए पुनर्वास के आधार पर उन्हें रिहा किया जाना उचित है।

कोर्ट ने कहा था कि जेल में उनका व्यवहार “बहुत अच्छा” रहा है और पैरोल पर रिहाई के बाद वे समय पर वापस लौटे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि उनमें अपराध दोहराने की संभावना बहुत कम है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि अपराध की गंभीरता को ही रिहाई से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता, यदि अन्य सभी मानदंड पूरे होते हों।

रशीद खान मार्च 1993 से जेल में बंद हैं। राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने 2015 में उनकी रिहाई की सिफारिश भी की थी, लेकिन बाद में टाडा मामलों से जुड़े कानूनी विवादों के कारण इसे वापस ले लिया गया।

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने रशीद खान की रिहाई का विरोध करते हुए कहा था कि वह इस विस्फोट का मास्टरमाइंड था और इस अपराध का समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ा था।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि तीन दशकों से अधिक की सजा के बाद दंड का उद्देश्य पूरा हो चुका है और यदि किसी अन्य मामले में आवश्यक न हो तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

--आईएएनएस

एसएके/वीसी