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पश्चिम बंगाल: प्रवासी मजदूर परिवारों की पहचान कर रोजगार कार्ड देगी सरकार

कोलकाता, 26 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में प्रवासी मजदूरों के परिवारों की पहचान करें ताकि उन्हें 'ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड' (जीआरजीसी) दिए जा सकें। ये कार्ड ग्रामीण परिवारों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी देते हैं, बशर्ते वे अकुशल शारीरिक काम करने के इच्छुक हों।
 

कोलकाता, 26 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में प्रवासी मजदूरों के परिवारों की पहचान करें ताकि उन्हें 'ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड' (जीआरजीसी) दिए जा सकें। ये कार्ड ग्रामीण परिवारों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी देते हैं, बशर्ते वे अकुशल शारीरिक काम करने के इच्छुक हों।

राज्य के पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में एक सर्कुलर सभी जिलाधिकारियों को भेजा है, जिसमें उनसे कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में प्रवासी मजदूरों के परिवारों की पहचान करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करें और पूरी करें।

राज्य के पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस साल 1 जुलाई से 'विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी-राम जी) एक्ट, 2025' लागू हो गया है। इस एक्ट के तहत, ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को एक साल में ज्यादा से ज्यादा 125 दिनों के काम की गारंटी मिलेगी। हालांकि, यह काम मुख्य रूप से उन वयस्कों के लिए है जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं। प्रशासन का मकसद इस गारंटी का इस्तेमाल करके गांव के लोगों के लिए नियमित आय के अवसर पैदा करना, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और प्रवासी मजदूरों के लिए अपने गृह राज्य लौटने की गुंजाइश बनाना है।

उन्होंने कहा कि इसीलिए पंचायत विभाग की गाइडलाइंस में प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को खास प्राथमिकता दी गई है।

अधिकारी ने कहा कि राज्य श्रम विभाग के अनुमान के मुताबिक, राज्य में अभी तक पहचाने गए प्रवासी मजदूरों की संख्या 22 लाख से ज्यादा है। वह लिस्ट संबंधित जिला प्रशासन को पहले ही सौंपी जा चुकी है। अब, उस जानकारी के आधार पर परिवारों की असल स्थिति की जांच करने का काम शुरू होगा।

राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को सलाह दी है कि वे प्रवासी मजदूरों के परिवारों की पहचान करने और उनके डेटा की जांच करने के काम को महज एक रूटीन प्रक्रिया न समझें।

राज्य सरकार को इस मामले में केंद्रीय मदद का भरोसा पहले ही मिल चुका था, और राज्य के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी एक्ट स्कीम के तहत लगभग 1.265 करोड़ रुपए मंजूर किए थे।

--आईएएनएस

एमएस/