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मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग करने की घोषणा की

कोलकाता, 16 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग करने की घोषणा की। बताया जाता है कि तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान इस बोर्ड का संचालन कोलकाता पुलिस के पूर्व उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास द्वारा किया जा रहा था। बिस्वास वर्तमान में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध भूमि हड़पने के मामलों में कथित संलिप्तता के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में हैं।
 
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग करने की घोषणा की

कोलकाता, 16 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग करने की घोषणा की। बताया जाता है कि तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान इस बोर्ड का संचालन कोलकाता पुलिस के पूर्व उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास द्वारा किया जा रहा था। बिस्वास वर्तमान में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध भूमि हड़पने के मामलों में कथित संलिप्तता के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस संबंध में राज्य प्रशासन द्वारा 18 मई को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान मीडियाकर्मियों से कहा कि आज मैं पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग करने के निर्णय की घोषणा करता हूं। इस संबंध में सोमवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। प्रारंभ में, बोर्ड का गठन कुछ नेक इरादों से किया गया था, लेकिन बाद में यह बोर्ड एक विशेष राजनीतिक दल की शाखा मात्र बनकर रह गया। मुझे नहीं पता कि पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण को सुनिश्चित करने में बोर्ड कितना सफल रहा, लेकिन निश्चित रूप से बाद के चरण में यह बोर्ड शांतनु सिन्हा बिस्वास जैसे पुलिस अधिकारियों के लिए सुविधा का साधन बन गया।

संयोगवश, मुख्यमंत्री की यह घोषणा नई राज्य सरकार द्वारा ईडी अधिकारियों द्वारा सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी के बाद दी गई दो साल की सेवा विस्तार अवधि को समाप्त करने के निर्णय के बाद आई है। सिन्हा बिस्वास को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अत्यंत करीबी माना जाता था, उक्त कल्याण बोर्ड के दो समन्वयकों में से एक थे।

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब से राजनीतिक हिंसा से प्रभावित लोग पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकेंगे और अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे, जिसके बाद भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक हिंसा के मामलों में यदि पीड़ितों को किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई विशेष शिकायत हो, तो वे संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। पुलिस अब निष्पक्ष रूप से कार्य करेगी और अपने साथी पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी शिकायतें स्वीकार करेगी। अब से पश्चिम बंगाल में कानून का शासन होगा, न कि शासक का कानून।

--आईएएनएस

एमएस/