Aapka Rajasthan

बांग्लादेश आईसीटी ने शिक्षाविद जफर इकबाल समेत 8 के खिलाफ आरोपों को किया स्वीकार

ढाका, 21 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने जुलाई 2024 के प्रदर्शनों से जुड़े कथित मानवता-विरोधी अपराधों के मामले में प्रमुख शिक्षाविद मोहम्मद जफर इकबाल, ढाका विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एएसएम मकसूद कमाल और पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश एएचएम शम्सुद्दीन चौधरी माणिक समेत आठ लोगों के खिलाफ आरोपों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।
 

ढाका, 21 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने जुलाई 2024 के प्रदर्शनों से जुड़े कथित मानवता-विरोधी अपराधों के मामले में प्रमुख शिक्षाविद मोहम्मद जफर इकबाल, ढाका विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एएसएम मकसूद कमाल और पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश एएचएम शम्सुद्दीन चौधरी माणिक समेत आठ लोगों के खिलाफ आरोपों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।

न्यायमूर्ति एमडी गोलाम मुर्तजा मजूमदार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अभियोजन पक्ष की ओर से दाखिल आरोपों का रविवार को संज्ञान लिया।

ट्रिब्यूनल ने पांच आरोपियों जफर इकबाल, मकसूद कमाल, अवामी लीग की छात्र शाखा छात्र लीग के पूर्व अध्यक्ष सद्दाम हुसैन, इसके तत्कालीन महासचिव शेख वली आसिफ एनान और तत्कालीन ढाका विश्वविद्यालय छात्र लीग अध्यक्ष मजहरुल कबीर शायन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए।

अन्य तीन आरोपी माणिक, ढाका विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के शिक्षक एकेएम जमाल उद्दीन और ढाका विश्वविद्यालय छात्र लीग के पूर्व महासचिव तनबीर हसन शैकत पहले से हिरासत में हैं। ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को उन्हें 22 अक्टूबर को उसके समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। द डेली स्टार ने यह रिपोर्ट दी।

इस बीच, एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने आठ लोगों के खिलाफ आईसीटी की कार्यवाही की कड़ी निंदा की है। संगठन ने कहा कि जांच ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित और पक्षपातपूर्ण तरीके’ से की गई तथा इसमें स्वतंत्र, निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जांच के न्यूनतम मानकों का पालन नहीं किया गया।

फ्रांस स्थित जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (जेएमबीएफ) ने कहा कि ऐसी ‘संदिग्ध जांच’ के आधार पर न्यायिक कार्यवाही शुरू किया जाना ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अधिकार संगठन ने कहा, “मानवता के खिलाफ अपराध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सबसे गंभीर अपराधों में शामिल हैं। ऐसे आरोपों को राजनीतिक विरोधियों, असहमति रखने वाली आवाजों, शिक्षाविदों, लेखकों, शिक्षकों या न्यायाधीशों के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध के साधन में बदलना न्याय का गंभीर दुरुपयोग है। किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा, बयान, पेशेवर पहचान या पिछली सरकार के साथ वास्तविक अथवा कथित संबंध व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी का विकल्प नहीं हो सकते। प्रत्येक आरोपी और कथित अपराधों के बीच विशिष्ट आचरण, आपराधिक मंशा और कानूनी रूप से स्थापित संबंध को विश्वसनीय साक्ष्यों के जरिए साबित किया जाना चाहिए।”

जेएमबीएफ ने चेतावनी दी कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों और प्रोफेसरों की अकादमिक गतिविधियों, अभिव्यक्ति या पेशेवर भूमिकाओं को मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों में बदलना और उन्हें न्यायिक कार्यवाही का सामना कराना अकादमिक स्वतंत्रता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।

उसने कहा कि किसी शिक्षाविद के खिलाफ व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी के विशिष्ट और विश्वसनीय साक्ष्य के बिना गंभीर अपराधों का मुकदमा चलाना तथा इसके बजाय उनकी राय, बयानों, अकादमिक पद या संस्थागत पहचान को आधार बनाना ‘अकादमिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन’ है।

जेएमबीएफ ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त, संबंधित विशेष प्रतिवेदकों, यूरोपीय संघ और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले के अलावा चल रहे सभी मामलों पर करीबी नजर रखने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निष्पक्ष तथा पारदर्शी सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाने का आह्वान किया।

--आईएएनएस

केआर/