वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश सरकार का बड़ा फैसला, देशभर के विश्वविद्यालय किए बंद
ढाका, 9 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। मौजूदा संकट को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने पूरे देश में विश्वविद्यालयों को बंद करने का आदेश जारी किया है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, विश्वविद्यालयों में छुट्टियां पवित्र ईद-उल-फितर की छुट्टियों के अंत तक जारी रहेंगी, जैसा कि विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर में निर्धारित है।
बांग्लादेश के बंगाली डेली अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, “वैश्विक संकट से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बिजली और ऊर्जा की बचत करना आवश्यक है। इसके लिए सभी सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बिजली और ऊर्जा के उपयोग में जिम्मेदारी और दक्षता दिखानी होगी।”
शिक्षा मंत्रालय ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए 11 बिंदुओं वाले निर्देशों को लागू करने का भी आह्वान किया है। इनमें वाहनों के उपयोग को सीमित करना भी शामिल है।
यह संकट पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से पैदा हुआ है, जो 28 फरवरी से और बढ़ गया है। उस दिन संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, अमेरिकी हितों और उन कई खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे वेस्ट एशिया में लड़ाई से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में तनाव बना हुआ है, बांग्लादेश को इसके नतीजे महसूस होने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सप्ताह के अंत में ढाका, चट्टोग्राम और अन्य स्थानों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। संभावित कमी के डर से वाहन चालक ईंधन भरवाने के लिए दौड़ पड़े।
द डेली स्टार के एडिटोरियल में कहा गया, “कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं, जहां चालक अपने टैंक भरवाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे थे। देश ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है, खासकर मध्य पूर्व से आने वाले फ्यूल ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) पर। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से परिवहन, उद्योग और घरों के लिए आपूर्ति में बाधा की चिंता बढ़ गई है।”
इसमें आगे कहा गया, "हमारे कच्चे तेल के इंपोर्ट का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जरूरी रास्ते से गुजरता है। हालांकि, ज्यादातर रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट दूसरे एशियाई सप्लायर से लिए जाते हैं, लेकिन ग्लोबल एनर्जी फ्लो में अनिश्चितता ने कंज्यूमर की चिंता बढ़ा दी है।"
--आईएएनएस
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