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बांग्लादेश चुनाव से पहले एनसीपी में फूट, जमात के साथ गठबंधन के बाद 14 बड़े नेताओं ने दिया इस्तीफा

ढाका, 3 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में अगले महीने की 12 फरवरी को आम चुनाव होने जा रहा है। 13वें संसदीय चुनाव की तैयारियों के बीच, नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) में अंदरूनी उथल-पुथल मची हुई है। बांग्लादेशी मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन को लेकर एनसीपी के नेताओं में आक्रोश है। इस वजह से एनसीपी के 14 केंद्रीय नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है।
 
बांग्लादेश चुनाव से पहले एनसीपी में फूट, जमात के साथ गठबंधन के बाद 14 बड़े नेताओं ने दिया इस्तीफा

ढाका, 3 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में अगले महीने की 12 फरवरी को आम चुनाव होने जा रहा है। 13वें संसदीय चुनाव की तैयारियों के बीच, नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) में अंदरूनी उथल-पुथल मची हुई है। बांग्लादेशी मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन को लेकर एनसीपी के नेताओं में आक्रोश है। इस वजह से एनसीपी के 14 केंद्रीय नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है।

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, पार्टी के अंदर एक समूह जमात के साथ गठबंधन को एक बहुत ही विरोधी विचारधारा और राजनीतिक रूप से 'आत्मघाती फैसला' मानता है। यही कारण है कि पार्टी से केंद्रीय नेताओं के इस्तीफों की बाढ़ आ गई।

वहीं पार्टी के कई बड़े नेता सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। इसके साथ ही, बांग्लादेशी बंगाली अखबार जुगंतोर की रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम के चुनावी हलफनामे में बताई गई इनकम को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई।

बांग्लादेश में राजनीति से इतर, जुलाई 2024 के प्रदर्शनों में शामिल लोगों, जिनमें मरने वालों और घायलों के परिवार शामिल हैं, ने कथित तौर पर कहा कि जमात के साथ चुनावी समझौता होने के बाद से, एनसीपी में केंद्रीय नेतृत्व से लेकर अलग-अलग जिलों और शहर के डिविजन के नेताओं तक, इस्तीफों का सिलसिला जारी है।

रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि एनसीपी के कई बड़े नेताओं ने जमात के साथ गठबंधन करने के पार्टी के फैसले को खारिज कर दिया और चुनावी गतिविधियों में शामिल भी नहीं हो रहे हैं।

इस बीच, जुगंतोर से बात करते हुए, शुक्रवार को एनसीपी के कई नेताओं ने इशारा किया कि पार्टी से इस्तीफों की संख्या तेजी से बढ़ने वाली है। ज्यादातर नेताओं के बीच पद छोड़ने को लेकर बातचीत जारी है।

कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि जुलाई 2024 के प्रदर्शनों और स्टूडेंट्स और आम जनता के खून से बनी पार्टी अब जुलाई के प्रदर्शनकारियों और आम लोगों को धोखा दे रही है। इन वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

जुलाई के प्रदर्शनों के दौरान मारे गए एक व्यक्ति के परिवार के एक और सदस्य ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "एनसीपी में इस तरह की टूट और इस्तीफों से हमारी मांगें पक्की नहीं हो पा रही हैं। सरकार ने पहले किए गए ज्यादातर वादों को पूरा नहीं किया। हमें एनसीपी से भी सहयोग का भरोसा नहीं मिल रहा है। पार्टी की इज्जत दिन-ब-दिन गिरती जा रही है।"

इसके अलावा, एनसीपी के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि जमात के साथ गठबंधन करने का फैसला मुख्य रूप से पार्टी के अंदर दो खास लोगों ने लिया, जिन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के ज्यादातर लोगों को किनारे कर दिया।

एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार को जुगंतोर से कहा, "हालांकि मैंने इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन मैंने पहले ही पार्टी की सभी गतिविधियों से खुद को दूर कर लिया है। पार्टी के कुछ टॉप नेताओं ने एक साथ कहा है कि मुझे कम से कम इस्तीफा नहीं देना चाहिए। अगर मैं इस्तीफा देता हूं, तो पार्टी के केंद्रीय, डिविजनल और अलग-अलग जिलों में एनसीपी का नेतृत्व करने वाले ज्यादातर नेता एक साथ इस्तीफा दे देंगे।"

बता दें, पार्टी में यह आंतरिक कलह ऐसे वक्त में देखने को मिल रहा है, जब चुनावों में अलग-अलग सीटों के लिए कई उम्मीदवारों की घोषणा हो गई है या चर्चा में हैं। कई घोषित उम्मीदवारों ने भी इस्तीफा दिया है।

--आईएएनएस

केके/एएस