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बांग्लादेश मुक्ति संग्राम: 50 साल बाद भी पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी पर जवाबदेही से बचने के आरोप

ढाका, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम के पांच दशक से अधिक समय बाद भी पाकिस्तान और कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर युद्ध अपराधों को लेकर स्पष्ट और बिना शर्त माफी से बचने के आरोप लगे हैं।
 
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम: 50 साल बाद भी पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी पर जवाबदेही से बचने के आरोप

ढाका, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम के पांच दशक से अधिक समय बाद भी पाकिस्तान और कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर युद्ध अपराधों को लेकर स्पष्ट और बिना शर्त माफी से बचने के आरोप लगे हैं।

‘टाइम्स ऑफ बांग्लादेश’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह केवल ऐतिहासिक विफलता नहीं बल्कि सच्चाई को छिपाने की एक सुनियोजित कोशिश है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान लंबे समय से “माफी” की जगह “खेद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर जिम्मेदारी से बचने की रणनीति अपनाता रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि “खेद” व्यक्त करना आसान होता है, क्योंकि इससे जिम्मेदारी स्वीकार किए बिना दुख जताया जा सकता है और ‘नरसंहार’ जैसे गंभीर शब्दों से बचा जा सकता है। इसे एक तरह की “योजनाबद्ध अस्पष्टता” बताया गया है।

वहीं, जमात-ए-इस्लामी की भूमिका को और अधिक गंभीर बताते हुए कहा गया है कि यह कोई बाहरी देश नहीं, बल्कि बांग्लादेश के भीतर सक्रिय राजनीतिक दल है, जिसने 1971 में न सिर्फ स्वतंत्रता का विरोध किया बल्कि पाकिस्तानी सैन्य शासन का साथ दिया और नागरिकों पर हुए अत्याचारों में शामिल रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी ने अपने अतीत का सामना करने के बजाय अपनी राजनीतिक छवि बदलने की रणनीति अपनाई है। उसके बयान ऐसे होते हैं जो माफी जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में जिम्मेदारी से बचने का प्रयास होते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हाल ही में ढाका स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर जमात द्वारा दी गई श्रद्धांजलि “सच्ची श्रद्धांजलि” नहीं बल्कि “प्रतीकात्मक दिखावा” है, क्योंकि वह इतिहास में उस समय गलत पक्ष में खड़ी थी जब ये शहीद हुए थे।

रिपोर्ट के अंत में कहा गया कि पाकिस्तान को अस्पष्ट बयानों के पीछे छिपना बंद करना चाहिए और जमात-ए-इस्लामी को भी अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक उनके सभी बयान और कदम केवल दिखावटी ही माने जाएंगे।

--आईएएनएस

डीएससी