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बांग्लादेश: चिन्मय कृष्ण दास को जमानत फिर भी रिहाई नहीं, हिंदू संगठन ने खड़े किए सवाल

ढाका, 7 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में जमानत मिलने के बावजूद जेल में ही रहना पड़ा, क्योंकि दो अन्य मामलों की वजह से उनकी रिहाई रुकी हुई है। स्थानीय मीडिया ने अदालती आदेश के हवाले से खबर साझा की। उनकी वर्तमान स्थिति पर हिंदूवादी संगठन ने हैरानी और नाराजगी जताई है।
 

ढाका, 7 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में जमानत मिलने के बावजूद जेल में ही रहना पड़ा, क्योंकि दो अन्य मामलों की वजह से उनकी रिहाई रुकी हुई है। स्थानीय मीडिया ने अदालती आदेश के हवाले से खबर साझा की। उनकी वर्तमान स्थिति पर हिंदूवादी संगठन ने हैरानी और नाराजगी जताई है।

हाई कोर्ट की एक बेंच, जिसमें जस्टिस केएम ज़ाहिद सरवर और जस्टिस शेख अबू ताहिर शामिल थे, ने रविवार को 'बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत' के प्रवक्ता चिन्मय द्वारा दायर दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद जमानत दे दी।

ये मामले 26 नवंबर, 2024 को चट्टोग्राम के कोतवाली पुलिस स्टेशन में तोड़-फोड़ और पुलिसकर्मियों को उनकी ड्यूटी करने से रोकने के आरोपों में दर्ज किए गए थे।

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' से बात करते हुए, चिन्मय के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि हिंदू नेता, जो 25 नवंबर, 2024 से जेल में हैं। उन पर हत्या और देशद्रोह सहित छह मामले दर्ज हैं।

कुमार ने कहा कि हालांकि चिन्मय को हाई कोर्ट और निचली अदालतों से पांच मामलों में जमानत मिल गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने देशद्रोह के मामले में उन्हें जमानत देने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।

चिन्मय को 25 नवंबर, 2024 को ढाका में गिरफ्तार किया गया था और चट्टोग्राम की अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अगले दिन जेल भेज दिया गया था। 11 दिसंबर को, उसी अदालत ने इस मामले में फिर से जमानत देने से इनकार कर दिया।

उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश और दुनिया भर में हिंदू समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। यह हिंसा मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के अठारह महीने के कार्यकाल के दौरान देखी गई और मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रशासन के तहत भी ऐसी घटनाएं जारी हैं।

इस बीच, दुनिया के प्रमुख एडवोकेसी संगठन, 'कोएलिशन ऑफ हिंदुज ऑफ नॉर्थ अमेरिका' (सीओएचएनए) ने चिन्मय की लगातार जेल में कैद की निंदा की और इसे "मजाक" और "सरकार द्वारा प्रायोजित उत्पीड़न" बताया। संगठन ने फैसले के बाद सोमवार को एक्स पर लिखा, "बांग्लादेश में एक हिंदू नेता, जिन्होंने अपने देश में अल्पसंख्यकों की बुनियादी सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाई थी, वे अब लगभग 2 साल से जेल में हैं। यह सरकार द्वारा प्रायोजित उत्पीड़न का एक सटीक उदाहरण है - उन पर एक ऐसी हत्या का आरोप लगाया गया है जो उनके पुलिस हिरासत में होने के बाद हुई थी।"

संगठन ने आगे कहा, "उनकी गिरफ्तारी के समय बांग्लादेश में एक नोबेल पुरस्कार विजेता का शासन था। आज वहां एक चुनी हुई सरकार सत्ता में है। लेकिन शासन चाहे किसी का भी हो, बांग्लादेशी हिंदुओं का उत्पीड़न कभी नहीं रुकता। यही कारण है कि 1951 में आबादी में उनकी हिस्सेदारी 22 प्रतिशत थी, जो आज घटकर 8 प्रतिशत रह गई है।"

पूरे बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लगातार हो रही हिंसा को "धीमा नरसंहार" बताते हुए सीओएचएनए ने सवाल किया कि क्या यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) इस दक्षिण एशियाई देश के हालात पर नजर रख रहा है।

--आईएएनएस

केआर/