बांग्लादेश में घरेलू हिंसा गंभीर संकट, हर दो में से एक महिला हुई शिकार
ढाका, 15 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ 'इंटीमेट पार्टनर' हिंसा गंभीर सामाजिक संकट बनी हुई है। वैश्विक और राष्ट्रीय आंकड़ों के विश्लेषण में यह सामने आया है कि घरेलू हिंसा के मामलों में बांग्लादेश दुनिया के सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गई।
अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर जारी रिपोर्टों में कहा गया कि अंतरंग संबंधों में होने वाली हिंसा महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है, साथ ही परिवार व्यवस्था को भी कमजोर कर रही है।
बांग्लादेश में घरेलू हिंसा लंबे समय से चिंता का विषय रही है, लेकिन इसके बावजूद देश आज भी इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में गिना जाता है। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों में बांग्लादेश महिलाओं के खिलाफ शारीरिक और यौन हिंसा के मामलों में दुनिया में 11वें स्थान पर है। दक्षिण एशिया में केवल अफगानिस्तान की स्थिति इससे खराब बताई गई है।
डब्ल्यूएचओ के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश में लगभग हर दो में से एक महिला अपने अंतरंग साथी द्वारा हिंसा का शिकार हुई है।
वहीं, ‘द डेली स्टार’ द्वारा समीक्षा किए गए बांग्लादेश ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (बीबीएस) के सर्वेक्षण में भी स्थिति की गंभीरता सामने आई है। सर्वे के अनुसार, 46.7 प्रतिशत महिलाओं ने अपने साथी द्वारा शारीरिक हिंसा झेलने की बात कही, जबकि 28.5 प्रतिशत महिलाओं ने यौन हिंसा का अनुभव बताया।
इसके अलावा, 32.7 प्रतिशत महिलाओं ने भावनात्मक उत्पीड़न, 9.7 प्रतिशत ने आर्थिक हिंसा और 50.1 प्रतिशत ने साथी द्वारा नियंत्रित व्यवहार का सामना करने की जानकारी दी।
फरवरी 2025 में जारी ‘वायलेंस अगेंस्ट वुमन सर्वे 2024’ में खुलासा हुआ कि बांग्लादेश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की 70 प्रतिशत महिलाओं ने अपने जीवनकाल में कम से कम एक प्रकार की अंतरंग साथी हिंसा का सामना किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की हिंसा महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ परिवारों को अस्थिर करती है, बच्चों के विकास पर असर डालती है और समाज में भय, चुप्पी तथा असमानता के चक्र को मजबूत करती है।
ढाका विश्वविद्यालय की मानवविज्ञान प्रोफेसर जोबैदा नसरीन ने कहा, “मेरे शोध से पता चलता है कि जिन परिवारों में साथी हिंसा आम होती है, वहां के बच्चे मानसिक आघात, रिश्तों से डर, अलगाववादी व्यवहार और प्रतिशोध की भावना के अधिक शिकार होते हैं।”
--आईएएनएस
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