बलूच मानवाधिकार डिफेंडर ने जयशंकर को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान के अत्याचारों का किया जिक्र
क्वेटा, 2 जनवरी (आईएएनएस)। बलूच में मानवाधिकार के लिए आवाज उठाने वाले जाने-माने डिफेंडर, मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे, सरकार की तरफ से प्रायोजित आतंकवाद और पिछले 79 सालों में बलूचिस्तान के लोगों पर हुए गंभीर मानवाधिकार से संबंधित अत्याचारों के बारे में बताया।
मीर यार बलूच ने नए साल के मौके पर ईएएम जयशंकर को संदेश भेजा। इसी संदेश में उन्होंने बलूच में लोगों के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी दी। मीर बलूच ने 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के तहत उठाए गए साहसी और पक्के इरादों वाले कदमों की सराहना की।
बता दें, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकी ठिकानों को खत्म कर दिया था। मीर ने इन कदमों को भारत की जबरदस्त हिम्मत, क्षेत्रीय सुरक्षा और इंसाफ के लिए पक्के इरादे का सबूत बताया।
चिट्ठी में उन्होंने लिखा, “बलूचिस्तान रिपब्लिक के छह करोड़ देशभक्त नागरिकों की तरफ से, हम भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी जाने-माने लोगों को नए साल 2026 की दिल से बधाई देते हैं। यह मौका उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, कमर्शियल, अर्थव्यवस्था, राजनयिक, सुरक्षा और कई तरह के रिश्तों पर सोचने और जश्न मनाने का मौका देता है, जिन्होंने सदियों से भारत और बलूचिस्तान को जोड़ा है।”
चिट्ठी में आगे कहा गया, “इन पक्के रिश्तों का उदाहरण हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसी पवित्र जगहें हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक रिश्तों का हमेशा रहने वाला प्रतीक हैं।”
मीर यार ने कहा कि बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को बहुत खतरनाक मानते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को उसके आखिरी चरण में पहुंचा दिया है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा, “अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्र फोर्स की क्षमता को और मजबूत नहीं किया गया और अगर उन्हें पुराने पैटर्न की तरह नजरअंदाज किया जाता रहा, तो यह सोचा जा सकता है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपने सैन्य बल तैनात कर सकता है। 60 मिलियन बलूच लोगों की मर्जी के बिना बलूचिस्तान की जमीन पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक ऐसा खतरा और चुनौती होगी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।”
--आईएएनएस
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