Aapka Rajasthan

सीएम हिमंता ने 'निजुत मोइना' योजना को बाल विवाह और स्कूल छोड़ने की समस्या से निपटने से जोड़ा

गुवाहाटी, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को 'मुख्यमंत्री निजुत मोइना' योजना का जिक्र करते हुए इसे बाल विवाह से निपटने और लड़कियों को पढ़ाई छोड़ने से रोकने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
 

गुवाहाटी, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को 'मुख्यमंत्री निजुत मोइना' योजना का जिक्र करते हुए इसे बाल विवाह से निपटने और लड़कियों को पढ़ाई छोड़ने से रोकने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

नवरात्रि के दूसरे दिन एक्स पर एक पोस्ट में सीएम सरमा ने देवी की शिक्षाओं और असम में पढ़ाई कर रही लड़कियों के संकल्प के बीच समानता बताई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'निजुत मोइना' योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में हायर सेकेंडरी, अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाली छात्राओं को हर साल 10 महीने तक मासिक आर्थिक सहायता मिलती है।

इस योजना के तहत हायर सेकेंडरी स्कूल स्तर की छात्राओं को हर महीने 1,000 रुपये, अंडरग्रेजुएट छात्राओं को 1,250 रुपये और पोस्टग्रेजुएट छात्राओं को हर महीने 2,500 रुपये मिलते हैं।

सरमा ने अपनी पोस्ट में कहा, "यह सिर्फ एक स्कॉलरशिप नहीं है। यह बाल विवाह और कम उम्र में पढ़ाई छोड़ने के खिलाफ एक मजबूत कदम है।"

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस पहल का मकसद परिवारों के बीच लड़कियों की शिक्षा के महत्व को मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि राज्य सरकार युवा महिलाओं को उनकी पढ़ाई-लिखाई से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करे।

सरमा के अनुसार, यह योजना यह संदेश देती है कि बेटियों को पढ़ाना एक सार्थक निवेश है और आर्थिक सहायता उन्हें कम उम्र में शादी के बंधन में बंधने के बजाय अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद कर सकती है।

नवरात्रि के धार्मिक महत्व का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई लड़की कम उम्र में शादी करने के बजाय किताबों को चुनती है, तो वह एक तरह की तपस्या कर रही होती है।

उन्होंने योजना का लाभ उठाने वाली लड़कियों के लिए मां ब्रह्मचारिणी का आशीर्वाद भी मांगा और कामना की कि उन्हें एकाग्रता, समझदारी और बिना किसी रोक-टोक के अपने सपनों को पूरा करने का साहस मिले।

'निजुत मोइना' योजना असम सरकार की उन पहलों में से एक है, जिनका मकसद लड़कियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना और कम उम्र में शादी व पढ़ाई छोड़ने जैसी सामाजिक चुनौतियों से निपटना है।

इस योजना के तहत दी जाने वाली आर्थिक मदद का मकसद पढ़ाई से जुड़े कुछ खर्चों को कम करना और परिवारों को अपनी बेटियों की पढ़ाई-लिखाई में तरक्की के लिए उनका साथ देने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सरमा के संदेश में नवरात्रि के धार्मिक महत्व और राज्य सरकार द्वारा महिलाओं की शिक्षा पर दिए जा रहे जोर का मेल था। इसमें शैक्षिक सशक्तिकरण को एक सामाजिक प्राथमिकता और लड़कियों को अपना भविष्य खुद संवारने में सक्षम बनाने के एक जरिये के तौर पर पेश किया गया।

--आईएएनएस

ओपी/पीएम