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असम : सीएम सरमा ने गेको की नई खोज को पूर्वोत्तर के लिए गर्व का क्षण बताया

गुवाहाटी, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को गेको की एक नई प्रजाति, 'साइर्टोडैक्टाइलस जयादित्याई' की खोज की सराहना करते हुए इसे राज्य और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।
 
असम : सीएम सरमा ने गेको की नई खोज को पूर्वोत्तर के लिए गर्व का क्षण बताया

गुवाहाटी, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को गेको की एक नई प्रजाति, 'साइर्टोडैक्टाइलस जयादित्याई' की खोज की सराहना करते हुए इसे राज्य और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खोज इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करती है और वन्यजीव विज्ञान और संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे शोधकर्ताओं की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि ऐसी खोजें न केवल वैज्ञानिक ज्ञान में इजाफा करती हैं, बल्कि इस क्षेत्र में लगातार पारिस्थितिक संरक्षण प्रयासों की जरूरत को भी मजबूत करती हैं।

सरमा ने अपने पोस्ट में कहा, "असम और पूर्वोत्तर के लिए यह एक गर्व का क्षण है। गेको की एक नई प्रजाति, 'साइर्टोडैक्टाइलस जयादित्याई' की खोज हमारी समृद्ध जैव विविधता और हमारे शोधकर्ताओं की बढ़ती ताकत को उजागर करती है।"

उन्होंने आगे कहा कि यह देखकर उत्साह मिलता है कि संरक्षण की पहल और वैज्ञानिक प्रतिभाएं मिलकर काम कर रही हैं, ताकि ऐसी महत्वपूर्ण खोजों को दुनिया के सामने लाया जा सके।

उनके अनुसार, यह खोज नाज़ुक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के महत्व को और मजबूत करती है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत जैसे जैव विविधता वाले क्षेत्रों में।

नई पहचानी गई प्रजाति साइर्टोडैक्टाइलस वंश से संबंधित है, जिसे आमतौर पर 'बेंट-टोएड गेको' (मुड़ी हुई उंगलियों वाले गेको) के रूप में जाना जाता है। ये पूरे एशिया में व्यापक रूप से पाए जाते हैं और अपनी पारिस्थितिक विविधता के लिए जाने जाते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि साइर्टोडैक्टाइलस जयादित्याई की पहचान से इस क्षेत्र में प्रजातियों के विकास और आवास विशेषज्ञता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञ लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि पूर्वोत्तर, अपनी अनूठी जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण, भारत के सबसे अधिक जैविक रूप से विविध क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। यहां अक्सर पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की नई प्रजातियां मिलती रहती हैं। हालांकि, वे यह चेतावनी भी देते हैं कि बढ़ती मानवीय गतिविधियां और पर्यावरण का क्षरण इन नाज़ुक आवासों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियां असम में संरक्षण नीतियों और वैज्ञानिक अनुसंधान पर नए सिरे से दिए जा रहे जोर के बीच आई हैं। राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों, संरक्षणवादियों और स्थानीय समुदायों के बीच अधिक सहयोग को बढ़ावा दे रही है।

सरमा ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी खोजें अनुसंधान और संरक्षण में लगातार निवेश करने के लिए प्रेरित करनी चाहिए, ताकि इस क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

--आईएएनएस

एससीएच