सीमावर्ती गांव पर्यटन और आजीविका के नए केंद्र बन रहे: सीएम पेमा खांडू
ईटानगर, 15 अगस्त (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शनिवार को कहा कि राज्य के सीमावर्ती गांव पर्यटन, आजीविका और स्थानीय उद्यम के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ से सीमावर्ती समुदायों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ईटानगर के इंदिरा गांधी पार्क में तिरंगा फहराने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम से सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे में सुधार, स्थानीय आजीविका को मजबूती और प्राकृतिक सुंदरता एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के पहले चरण के तहत भारत-तिब्बत (चीन) सीमा से लगे 455 गांवों में करीब 2,800 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। वहीं, दूसरे चरण में भारत-म्यांमार और भारत-भूटान सीमा से लगे 122 अन्य गांवों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
खांडू ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ स्थानीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करना है।
मुख्यमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश की विशाल जलविद्युत क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और नेट-जीरो लक्ष्यों को हासिल करने में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा, “इसी विजन के तहत हमने 2025-2035 को ‘जलविद्युत का दशक’ घोषित किया है। हमारा लक्ष्य करीब 19 गीगावाट जलविद्युत क्षमता स्थापित करना है, जिसके लिए लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।”
उन्होंने बताया कि भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना के रूप में वर्णित सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की आठ में से चार इकाइयां पहले ही चालू हो चुकी हैं और उनसे 1,000 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। शेष चार इकाइयों के भी इस साल चालू होने की उम्मीद है।
खांडू के अनुसार, केंद्र सरकार ने 1,720 मेगावाट की कमला हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना और 1,200 मेगावाट की कलई-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए करीब 40,175 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इसके अलावा टाटो-I, टाटो-II और हेओ जलविद्युत परियोजनाओं पर भी काम जारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, बिखरी हुई आबादी और कनेक्टिविटी की चुनौतियों के बावजूद उनकी सरकार ने पिछले एक दशक में इन खामियों को दूर करने का प्रयास किया है, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा, “विकास हर व्यक्ति और हर क्षेत्र तक पहुंचना चाहिए। दूरी, भौगोलिक परिस्थितियों या किसी अन्य कारण से कोई नागरिक पीछे नहीं छूटना चाहिए।”
खांडू ने बताया कि राज्य में 1.5 लाख से अधिक महिलाएं 16 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी हैं। इनमें हजारों महिलाएं उद्यमी, सामुदायिक नेता और बदलाव की एजेंट बन रही हैं।
शिक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मिशन शिक्षित अरुणाचल’ के पहले चरण में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए 3,112.50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसके तहत बुनियादी ढांचे, प्रशासन, शिक्षण गुणवत्ता, डिजिटल शिक्षा और संस्थागत क्षमता में सुधार किया जा रहा है।
इसके अलावा 50 सरकारी स्कूलों को ‘गोल्डन जुबली स्कूल’ के रूप में विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। उन्होंने कहा कि इन पहलों के परिणामस्वरूप सरकारी स्कूलों में नामांकन में 13.33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों असम और नागालैंड में हाल में आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता जताई।
उन्होंने कहा, “प्रकृति ने एक बार फिर हमारी परीक्षा ली है। इससे हमारे समुदायों के सामने बड़ी चुनौतियां आई हैं और लोगों का जीवन, आजीविका तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है।”
खांडू ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों को मजबूत करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत 44.55 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि मंजूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया।
उन्होंने बताया कि एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने भी राज्य का दौरा कर नुकसान का आकलन किया और आवश्यक सहायता का जायजा लिया।
खांडू ने प्रधानमंत्री मोदी की 22 सितंबर 2025 की ईटानगर यात्रा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान प्रधानमंत्री ने 5,100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। प्रधानमंत्री ने 186 मेगावाट की टाटो-I और 240 मेगावाट की हेओ जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी थी, जिनमें राज्य में 3,700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शामिल है।
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के समृद्ध जंगलों, नदियों, जैव विविधता और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षक के रूप में अरुणाचल प्रदेश की जिम्मेदारी है कि विकास को जलवायु-अनुकूल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
उन्होंने केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर में बौद्ध सर्किट विकसित करने की घोषणा का उल्लेख करते हुए राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी जोर दिया।
--आईएएनएस
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