बौद्ध विरासत के संरक्षण में अरुणाचल प्रदेश की अहम भूमिका रही है: सीएम पेमा खांडू
ईटानगर, 3 नवंबर (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश सदियों से बौद्ध दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक आदान-प्रदान का जीवंत केंद्र रहा है। राज्य ने बौद्ध विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को यह बात कही।
तवांग में 'बौद्ध धर्म : हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार' विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की बौद्ध विरासत का व्यापक बौद्ध परंपरा में विशेष स्थान है। तवांग और आसपास के क्षेत्रों में स्थित मठ, बौद्ध विहार, मंदिर और एकांत साधना स्थल केवल पूजा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ज्ञान के भंडार, शिक्षा के केंद्र और ऐसी जीवंत संस्थाएं हैं, जिन्होंने सदियों से अमूल्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया है।
खांडू ने इस विरासत की रक्षा के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि विकास और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया क्षेत्र के सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की बौद्ध विरासत न केवल आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत है, बल्कि विभिन्न समुदायों, देशों और सभ्यताओं को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सेतु भी है।
मुख्यमंत्री ने दुनिया से अपील की कि संघर्ष, असहिष्णुता और बढ़ते विभाजन के इस दौर में शांति के लिए भगवान बुद्ध की करुणा, ज्ञान और मध्यम मार्ग की शाश्वत शिक्षाओं को अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं शांति, सद्भाव और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाती हैं। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन अरुणाचल प्रदेश सरकार और इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) संयुक्त रूप से केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कर रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश और विशेष रूप से तवांग के लोगों की ओर से प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने तवांग को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध भूमि बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र तवांग मठ का घर है, जो बौद्ध ज्ञान और शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म के प्रसार पर इस सम्मेलन का आयोजन तवांग में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने बौद्ध धर्म को केवल एक धर्म नहीं, बल्कि करुणा, ज्ञान और मध्यम मार्ग पर आधारित जीवन जीने का तरीका बताया।
खांडू ने विश्वास जताया कि सम्मेलन में शामिल प्रतिष्ठित विद्वानों और आध्यात्मिक विचारकों की मौजूदगी से आने वाली पीढ़ियों तक भगवान बुद्ध के संदेश को पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण विचार सामने आएंगे। उन्होंने राज्य सरकार के साथ साझेदारी करने के लिए इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन का आभार भी जताया।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की शुरुआत संघ के सदस्यों द्वारा मंगलाचरण के साथ हुई। इसके बाद आईबीसी के महासचिव शारत्से खेंसुर रिनपोछे जांगचुप चोएडेन ने स्वागत भाषण दिया। तवांग गादेन नामग्याल ल्हात्से मठ के मठाधीश रेव. ड्रामेड सुंगराब तुल्कु ला और एबीसी के अध्यक्ष ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम के तहत पहला पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया, जिसका संचालन राजीव गांधी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मोजी रीबा ने किया। इसमें अरुणाचल प्रदेश, श्रीलंका, म्यांमार और दिल्ली के वक्ताओं ने हिस्सा लिया। इसके बाद हुए सत्रों में जर्मनी, इंडोनेशिया, नेपाल, मलेशिया और भारत के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वानों ने अपने विचार रखे।
--आईएएनएस
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