अरुणाचल प्रदेश में बाल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई, 19 बच्चों को बचाया, तीन महिलाएं गिरफ्तार
ईटानगर, 25 अगस्त (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने कथित बाल तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 19 बच्चों को सुरक्षित बचाया है। इस मामले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर बिचौलिया और नेटवर्क संचालकों की मददगार होने का आरोप है।
पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि विशेष जांच दल ने राज्य के विभिन्न इलाकों से बच्चों को बरामद किया है। बचाए गए बच्चों को मेचुका, आलो, पासीघाट, नाहरलगुन, ईटानगर और लोंगडिंग समेत कई स्थानों से सुरक्षित निकाला गया।
जांच के दौरान गुमन्या कोचुंग, मार्टा एटे और नेहा गेरोरी को गिरफ्तार किया गया। इन पर बच्चों को अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने और सौदे कराने में भूमिका निभाने का आरोप है।
यह मामला 17 अगस्त को नामसाई जिले की बाल कल्याण समिति की शिकायत के आधार पर नामसाई पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
मामले की गंभीरता और इसके कई जिलों से जुड़े होने को देखते हुए नामसाई जिले के पुलिस अधीक्षक सांगे थिनले की निगरानी में विशेष जांच दल का गठन किया गया। जांच में उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) मार्टिन रतन भी सहयोग कर रहे हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संपर्क कर उन्हें बच्चों की बेहतर शिक्षा, देखभाल और भविष्य का भरोसा दिया जाता था।
इसके बाद बच्चों को कथित तौर पर उनके परिवारों से लेकर दूर-दराज के इलाकों में अलग-अलग लोगों के पास भेज दिया जाता था।
पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में प्रत्येक बच्चे के बदले 10,000 रुपए से 50,000 रुपए तक के लेनदेन के संकेत भी मिले हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में बच्चों को सौंपने के बदले माता-पिता या अभिभावकों को पैसे दिए गए थे। हालांकि पुलिस सभी संबंधित लोगों की भूमिका की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। बचाए गए कुछ बच्चों से घरेलू काम और होटलों में काम करवाए जाने के भी संकेत मिले हैं। पुलिस ने बताया कि इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू बच्चों की कम उम्र है।
एक पुलिस बयान के अनुसार, बचाए गए अधिकांश बच्चों की उम्र आठ वर्ष से कम है। प्रारंभिक बातचीत में कुछ बच्चे अपने माता-पिता के नाम या परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी तक नहीं बता पाए।
जांच में सामने आया कि सबसे छोटा बच्चा कथित तौर पर केवल तीन वर्ष का था, जब उसे परिवार से अलग किया गया।
रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और बाल संरक्षण से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
इसके बाद बच्चों को सक्षम बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। उनकी गवाही भी कानून के अनुसार मजिस्ट्रेट के समक्ष बाल-अनुकूल और संवेदनशील प्रक्रिया के तहत दर्ज कराई जा रही है।
एसआईटी अब कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने के लिए वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत, बच्चों की आवाजाही और आरोपियों के आपसी संबंधों की जांच कर रही है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि बच्चों की पहचान, तस्वीरें और अन्य व्यक्तिगत जानकारी को कानूनी प्रावधानों के तहत गोपनीय रखा जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि 19 बच्चों का बचाव इस अभियान का अंत नहीं है। जांच टीमें अभी भी अन्य बच्चों का पता लगाने और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हुई हैं।
नामसाई जिला पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी है जिन्हें इसी तरह ले जाया गया हो या किसी अन्य व्यक्ति के पास रखा गया हो, तो वे तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या बाल कल्याण समिति से संपर्क करें।
पुलिस ने उन अभिभावकों से भी आगे आने की अपील की है जिन्होंने किसी बिचौलिए के माध्यम से अपने बच्चों को दूसरों के पास भेजा हो।
पुलिस ने कहा कि प्राप्त होने वाली हर विश्वसनीय जानकारी की तत्काल जांच की जाएगी और बच्चों की सुरक्षा, गरिमा तथा सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
--आईएएनएस
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