बंगाल: गिरफ्तार पाक नागरिक ने भारतीय पहचान पत्र पाने को सह-आरोपी के पिता के नाम का किया इस्तेमाल
कोलकाता, 13 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हावड़ा से गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी नागरिक ने भारतीय पहचान पत्र पाने के लिए सह-आरोपी के पिता के नाम का इस्तेमाल किया था। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच से पता चला है कि हाबरा में गिरफ्तार पाकिस्तानी नागरिक वहाब आलम ने भारतीय पहचान-पत्र हासिल करने के लिए सह-आरोपी मोहम्मद इजाज के पिता के नाम का इस्तेमाल किया था।
सूत्रों के मुताबिक, 2012 में गैरकानूनी तरीके से भारत में घुसने के बाद आलम न सिर्फ पूर्वी कोलकाता के टोपसिया में इजाज के घर पर लंबे समय तक रहा बल्कि उसने अपने लिए भारतीय पहचान पत्र बनवाने को इजाज के पिता के दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया।
एसटीएफ अधिकारियों को आलम के पास से जो भारतीय पहचान दस्तावेज मिले उनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड और ईपीआईसी कार्ड शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों में इजाज के पिता को ही आलम का पिता बताया गया है। पता चला है कि आलम की इच्छा उन दस्तावेजों के आधार पर अपने लिए भारतीय पासपोर्ट बनवाने की थी।
हालांकि, पश्चिम बंगाल में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (एसआईआर) प्रक्रिया के कारण उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
'लॉजिकल डिसक्रेपेंसी' (तार्किक विसंगति) श्रेणी में आने के कारण बीएलओ ने आलम को अपनी पहचान साबित करने के लिए सुनवाई के लिए बुलाया था। वह सुनवाई के लिए नहीं पहुंचा और इसके बजाय उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा भाग गया, जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
आलम उत्तर 24 परगना जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए पड़ोसी देश बांग्लादेश भागने की फिराक में था। पता चला है कि हल्दिया में रहने के दौरान वह अक्सर नेपाल आता-जाता रहता था, जहां उसका एक छोटा सा फेंचाइजी का कारोबार है।
जांच में यह भी सामने आया है कि पश्चिम बंगाल में घुसने और रहने की पूरी साजिश में आलम के लिए नेपाल एक अहम जगह थी। उसे पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने देश के पूर्वी सेक्टर में भारतीय सेना, नौसेना और रेलवे के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का काम सौंपा था।
वह सबसे पहले 2012 में नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था, जहां एक मस्जिद में उसकी मुलाकात इजाज से हुई थी।
जांच में यह भी पता चला है कि आलम ने कई प्रीपेड मोबाइल सिम कार्ड इस्तेमाल किए, जो सभी उसने अपने भारतीय पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके हासिल किए थे। वह इन सिम कार्ड का इस्तेमाल पाकिस्तान में अपने आईएसआई हैंडलर्स के संपर्क में रहने के लिए करता था।
जांच से यह भी पता चला है कि आईएसआई हैंडलर्स से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड कुछ बातचीत के बाद नष्ट कर दिए जाते थे और बाद में उस काम के लिए नए सिम कार्ड ले लिए जाते थे।
--आईएएनएस
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