जम्मू-कश्मीर: राजौरी में नियंत्रण रेखा के पास हुए विस्फोट में सेना का कुली घायल
जम्मू, 2 नवंबर (आईएएनएस)। सोमवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास एक एंटी-पर्सनल माइन पर गलती से पैर रखने के कारण सेना का एक कुली गंभीर रूप से घायल हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि लंगर गांव के निवासी कृष्ण लाल सुबह 11:30 बजे नौशेरा सेक्टर के अग्रिम क्षेत्र से गुजरते समय गलती से माइन विस्फोट में फंस गए।
अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट में लाल का दाहिना पैर कट गया और उन्हें तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सीमा पार घुसपैठ को रोकने के लिए नियंत्रण रेखा के साथ लगे अग्रिम क्षेत्रों में माइन बिछाई गई हैं। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण कभी-कभी इनमें से कुछ माइन अपनी जगह से हट जाती हैं और बह जाती हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं और अग्रिम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा होता है।
सेना के कुली वे नागरिक मजदूर हैं, जिन्हें जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सामान आदि ढोने के लिए सेना द्वारा नियुक्त किया जाता है। सेना हमेशा से ही अपने पोर्टरों को उनके काम के दौरान किसी दुर्घटना का शिकार होने पर मुआवजा देती रही है।
जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के पोर्टर भर्ती रैलियों में कठिन, उच्च-ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में आवश्यक रसद और आपूर्ति श्रृंखला कार्यों को संभालने के लिए संविदा आधार पर नागरिक पोर्टरों की भर्ती की जाती है।
उनकी भर्ती के लिए सामान्य मानदंड में 18 से 40 वर्ष की आयु सीमा, पुरुष नागरिकों के लिए खुला होना और आम तौर पर जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों के निवासियों के लिए खुला होना शामिल है, हालांकि तकनीकी रूप से किसी भी भारतीय राज्य के उम्मीदवार खुली रैलियों में भाग लेने के पात्र हैं। उम्मीदवार को चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाले अभियानों को संभालने के लिए चिकित्सकीय और शारीरिक रूप से फिट होना चाहिए।
सेना के पोर्टर जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बेहद खराब मौसम और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करते हुए सराहनीय सेवा दे रहे हैं। ये नागरिक श्रमिक सेना के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं और सीमा रक्षा कर्मियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
--आईएएनएस
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