अच्युतानंदन स्मृति अंक पर केरल सीपीआई(एम) में टकराव, विवादित लेख हटाया गया
तिरुवनंतपुरम, 20 जुलाई (आईएएनएस)। पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन (वीएस) की पहली पुण्यतिथि पर प्रकाशित विशेष संस्करण हाल के वर्षों में सीपीआई(एम) के मुखपत्र 'देशाभिमानी' से जुड़ा सबसे बड़ा संपादकीय विवाद बन गया है।
तकनीकी कारणों से एक दिन की देरी के बाद सोमवार को अखबार का वीकेंड सप्लीमेंट प्रकाशित किया गया। इसमें थिएटर एक्टिविस्ट 'कल्लन विजयन' पर छपा विवादित लेख हटा दिया गया। अंग्रेजी में 'कल्लन विजयन' का अर्थ 'थीफ विजयन' यानी 'चोर विजयन' भी निकाला जा सकता है।
'मुझांगुन्नीप्पोज़हुम आ कदलारंबम' (यानी 'उस समुद्र की गूंज आज भी सुनाई देती है') शीर्षक वाले इस विशेष संस्करण में कई लेखकों ने वी.एस. अच्युतानंदन से जुड़ी अपनी यादें साझा की हैं। इनमें उनके पूर्व प्रेस सचिव के.वी. सुधाकरन भी शामिल हैं।
स्मारक से जुड़ी सामग्री सप्लीमेंट के पहले और आखिरी दोनों पन्नों पर प्रकाशित की गई है। हालांकि, विवाद उस दूसरे लेख को लेकर था, जिसे पहले इसी विशेष अंक में प्रकाशित किया जाना था।
'कल्लन विजयन, धन्य नाटक ग्राम, मुथिप्पारा पी.ओ.' शीर्षक वाले इस लेख में पुल्लमपारा के मशहूर थिएटर कार्यकर्ता विजयन का परिचय दिया गया है, जिन्हें लोग 'कल्लन विजयन' के नाम से जानते हैं।
सूत्रों के अनुसार, संपादकीय टीम के कुछ सदस्यों ने लेआउट पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि अगर आखिरी पन्ने पर 'कल्लन विजयन' (जिसका अंग्रेज़ी में अर्थ 'चोर विजयन' भी हो सकता है) जैसी बड़ी हेडलाइन छपे और पहले पन्ने पर वी.एस. अच्युतानंदन की तस्वीर और स्मृति लेख हो, तो इसका गलत राजनीतिक मतलब निकाला जा सकता है।
आशंका थी कि दोनों पन्नों को एक साथ दिखाकर इसे कम्युनिस्ट पार्टी के दिवंगत वरिष्ठ नेता का अपमान बताया जा सकता है।
खबरों के मुताबिक, यह मतभेद बाद में संपादकीय विवाद बन गया। इसके चलते आखिरी समय में छपाई रोक दी गई और रविवार को प्रकाशित होने वाला वीकेंड सप्लीमेंट एक दिन के लिए टाल दिया गया।
हालांकि, 'देशाभिमानी' ने कहा कि सप्लीमेंट में देरी तकनीकी कारणों से हुई। लेकिन रेजिडेंट एडिटर एम. स्वराज ने यह कहकर विवाद और बढ़ा दिया कि 'कल्लन विजयन' पर कोई लेख कभी तैयार ही नहीं किया गया था।
उन्होंने लेख से जुड़ी खबरों को बेबुनियाद बताया और कहा कि कोई संपादकीय विवाद नहीं हुआ था। हालांकि, उनके इस दावे पर जल्द ही खुद कल्लन विजयन ने सवाल उठाए।
थिएटर एक्टिविस्ट ने बताया कि 'देशाभिमानी' के प्रतिनिधियों ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने उनके जीवन और काम से जुड़ी जानकारी ली थी और एक ग्रुप फोटो भी मांगी थी, जिसे उन्होंने उपलब्ध करा दिया था।
उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया था कि उनका लेख वीकेंड सप्लीमेंट में प्रकाशित होगा। लेकिन बाद में उसे क्यों हटा दिया गया, इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं दी गई।
उनके बयान ने अखबार के आधिकारिक दावे पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद इस पूरे मामले को संभालने के तरीके पर भी कई सवाल उठने लगे।
समाज के अलग-अलग वर्गों से बढ़ती आलोचना के बीच लोगों ने आरोप लगाया कि पार्टी के अखबार ने वी.एस. अच्युतानंदन को समर्पित विशेष अंक को ठीक से तैयार नहीं किया था। इसके बाद 'देशाभिमानी' ने उस सप्लीमेंट को दोबारा तैयार करने का फैसला किया।
सोमवार को प्रकाशित संस्करण में सिर्फ श्रद्धांजलि से जुड़े लेख शामिल हैं। वहीं, कल्लन विजयन पर लिखा गया लेख पूरी तरह हटा दिया गया है।
अब उम्मीद की जा रही है कि सीपीआई(एम) इस पूरे मामले की आंतरिक जांच करेगी।
जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि वी.एस. स्मृति अंक में 'कल्लन विजयन' पर लेख क्यों शामिल किया गया था, उसे श्रद्धांजलि वाले पन्नों के साथ क्यों रखा गया, लेआउट को किसने मंजूरी दी और अखबार का आधिकारिक बयान थिएटर एक्टिविस्ट के दावे से अलग क्यों है।
इस विवाद ने न सिर्फ संपादकीय स्तर पर हुई चूक को उजागर किया, बल्कि पार्टी के अखबार के दावों में मौजूद विरोधाभास भी सामने ला दिए। इसका असर यह हुआ कि केरल के सबसे बड़े कम्युनिस्ट नेताओं में से एक वी.एस. अच्युतानंदन को श्रद्धांजलि देने का मकसद एक ऐसे राजनीतिक और मीडिया विवाद में बदल गया, जिसे टाला जा सकता था।
--आईएएनएस
एसएचके/पीएम
