आंध्र प्रदेश: गजट नोटिफिकेशन के बाद स्थानीय निकाय चुनावों का शेड्यूल घोषित करेगा एसईसी
विजयवाड़ा, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) अनिल चंद्र पुनेथा ने मंगलवार को कहा कि आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों का कार्यक्रम संबंधित विभागों द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी करने के बाद घोषित किया जाएगा।
एसईसी ने कहा कि चुनाव का शेड्यूल तब घोषित किया जाएगा जब राज्य सरकार चुनाव के लिए अपनी तैयारी की जानकारी देगी।
पुनेथा ने कहा कि चुनाव प्रभावी ढंग से कराए जाएंगे। उन्होंने संवेदनशील और अति-संवेदनशील इलाकों में सभी सुरक्षा उपायों का भरोसा दिलाया। उन्होंने मंगलवार को 20 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।
बैठक के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए सुरक्षा की मांग की। उन्होंने एसईसी को कई सुझाव भी दिए, जिनमें समय पर जाति प्रमाण पत्र जारी करना शामिल है।
राज्य सरकार ने सोमवार को 17 नगर निगमों में मेयर और 106 नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों में अध्यक्ष के पदों के लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी), पिछड़ा वर्ग (बीसी) और महिलाओं के लिए आरक्षण की घोषणा की।
राज्य सरकार ने एसटी के लिए एक मेयर सीट (मंगलगीरी ताडेपल्ली), एसटी के लिए दो सीटें (कुरनूल महिला और राजमहेंद्रवरम सामान्य) और बीसी के लिए पांच सीटें (काकीनाडा महिला, मछलीपट्टनम महिला, एलुरु सामान्य, अनंतपुरम सामान्य और चित्तूर सामान्य) आरक्षित की हैं।
विजयनगरम, श्रीकाकुलम, गुंटूर, कडप्पा और ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम (जीवीएमसी) में मेयर की पांच सीटें महिलाओं (सामान्य) के लिए आरक्षित की गई हैं।
तिरुपति, विजयवाड़ा, ओंगोल और नेल्लोर में मेयर की सीटें अनारक्षित रखी गई हैं।
नगर प्रशासन के कमिश्नर और डायरेक्टर पी. संपत कुमार ने राज्य के 13 बड़े नगर निगमों में एसटी, एससी, बीसी और महिलाओं के लिए वार्ड-वार सीटों के आरक्षण को तय और अंतिम रूप देते हुए एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया।
हाई कोर्ट द्वारा बीसी के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण के आदेश को रद्द किए जाने के बाद राज्य सरकार ने सभी कैटेगरी के लिए कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने बीसी कोटा बढ़ाने को सही ठहराने के लिए राज्य सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए डेटा, खासकर 'यूनिफाइड फैमिली सर्वे' के नतीजों के कानूनी आधार पर सवाल उठाए।
1 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी के लिए 34 प्रतिशत आरक्षण देने वाले सरकार के दो आदेशों को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि यह कोटा कुल आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन करता है।
हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, स्थानीय निकायों में सभी कैटेगरी के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
कोर्ट का यह फैसला एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के लिए एक झटका था, क्योंकि स्थानीय निकायों में बीसी आरक्षण को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 34 प्रतिशत करना 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान उनके मुख्य वादों में से एक था।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 18 अगस्त को बढ़े हुए कोटे की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि बीसी को ग्रामीण स्थानीय निकायों में 34 प्रतिशत और शहरी स्थानीय निकायों में 33.33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
--आईएएनएस
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