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आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में ईडी ने पांच आरोपियों के ठिकानों पर मारा छापा

विजयवाड़ा, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के बहुचर्चित कई करोड़ के शराब घोटाले में जांच तेज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने इस मामले में छह आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
 
आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में ईडी ने पांच आरोपियों के ठिकानों पर मारा छापा

विजयवाड़ा, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के बहुचर्चित कई करोड़ के शराब घोटाले में जांच तेज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने इस मामले में छह आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।

सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीमें शुक्रवार सुबह से ही हैदराबाद, विजयवाड़ा और तिरुपति में आरोपियों के घरों, दफ्तरों और अन्य परिसरों पर लगातार तलाशी ले रही हैं। जिन लोगों के यहां छापे पड़े, उनमें वाईएसआर कांग्रेस के नेता और पूर्व विधायक चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी, मुख्य आरोपी केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, भारती सीमेंट्स के निदेशक बालाजी गोविंदप्पा, कृष्ण मोहन और धनुंजय रेड्डी शामिल हैं।

ईडी यह कार्रवाई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर कर रही है। इससे पहले 9 मार्च को ईडी ने कृष्ण मोहन और धनुंजय रेड्डी समेत चार आरोपियों से पूछताछ भी की थी।

बताया जाता है कि कृष्ण मोहन पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) रह चुके हैं जबकि धनुंजय रेड्डी मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में सचिव के पद पर तैनात थे।

इससे तीन दिन पहले ही ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 441.63 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच की थीं। ये संपत्तियां केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, उनके परिवार, उनसे जुड़े लोगों, बूनेटी चाणक्य, डोंथीरेड्डी वासुदेव रेड्डी और अन्य संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की बताई जा रही हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई थी।

ईडी ने यह जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर राज्य सरकार के प्रधान सचिव की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें सरकारी खजाने को करीब 4,000 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया है।

जांच में सामने आया है कि इस घोटाले में नकद रिश्वत (किकबैक) कई जगहों पर जमा की जाती थी, खासकर हैदराबाद में। वहां से इसे अलग-अलग जगहों पर भेजा, बांटा या खत्म किया जाता था, जिसके लिए सिंडिकेट के खास लोग जिम्मेदार थे।

ईडी की जांच में अब तक करीब 1048.45 करोड़ रुपये के किकबैक का मनी ट्रेल सामने आया है। आरोप है कि कई डिस्टिलरी को जबरन नकद, सोना और अन्य तरीकों से भुगतान करना पड़ा। साथ ही कुछ डिस्टिलरी का संचालन भी इस सिंडिकेट के नियंत्रण में था और शराब परिवहन से भी आर्थिक लाभ लिया गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस अवैध कमाई का इस्तेमाल जमीन-जायदाद खरीदने और व्यक्तिगत फायदे के लिए किया गया। ईडी का यह भी दावा है कि इस अपराध से जुड़ी बड़ी रकम को आरोपियों ने छिपा दिया है या उसे इधर-उधर कर दिया गया है।

फिलहाल, ईडी की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम