आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की
अमरावती, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को चक्रवात प्रभावित जिलों के हालात और वहां चल रहे राहत व बहाली कार्यों की समीक्षा की।
सीएम नायडू ने प्रशासनिक तंत्र से कहा कि जब तक जमीनी स्तर पर हालात पूरी तरह सामान्य न हो जाएं, तब तक वे चैन से न बैठें। विभिन्न विभागों के अधिकारियों और जिला कलेक्टरों के साथ एक टेलीकॉन्फ्रेंस के दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्यादातर प्रभावित इलाकों में हालात सामान्य हो गए हैं।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि चक्रवात से हुए नुकसान की एक शुरुआती रिपोर्ट आज दिन में सौंप दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय वे लोगों के साथ खड़े रहें। चक्रवात के दौरान प्रशासनिक तंत्र ने बहुत बेहतरीन काम किया।
मुख्यमंत्री नायडू ने बताया कि आंध्र प्रदेश इस समय अलग-अलग तरह के मौसम का सामना कर रहा है। 'एल नीनो' के असर से रायलसीमा क्षेत्र को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अन्य क्षेत्रों को चक्रवात 'अर्नब' की वजह से चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। जनता की मदद के लिए प्रशासन को दोनों ही स्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि रायलसीमा में फसल बोने के लिए हालात अनुकूल नहीं हैं जबकि उत्तरी आंध्र, तटीय क्षेत्रों और गोदावरी जिलों में चक्रवात के कारण फसलें बर्बाद हो गई हैं और नारियल के बागानों को भी नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि हमें एक सुनियोजित योजना के जरिए लोगों की मदद करनी चाहिए, ताकि वे इन प्राकृतिक आपदाओं के असर से उबर सकें। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि चक्रवात 'अर्नब' के कारण जान-माल का नुकसान कम से कम हो। तालाबों और नहरों को टूटने से बचाने के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
सीएम ने कहा कि चक्रवात के कारण जमा हुआ मलबा भी साफ किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि शुक्रवार तक सभी इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मुआवजे को लेकर एक सरकारी आदेश जारी कर दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन जल्द से जल्द तैयार किया जाए। उन्होंने उनसे यह पता लगाने को कहा कि पानी में डूबी फसलों में से कितनी फसल को बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और छात्रों को इस मामले का अध्ययन करना चाहिए। ऐसे उपाय खोजे जाएं जिनसे फसलों को पूरी तरह नष्ट होने या गाद के कारण बर्बाद होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि फसल के नुकसान के अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे नारियल के पेड़ों और बागवानी की विभिन्न फसलों सहित अन्य पेड़-पौधों को फिर से लगाने की संभावनाओं की जांच करें। चक्रवात के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को मुआवजा देने वाली संबंधित योजनाओं को लागू किया जाए।
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