आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अल नीनो से एक चुनौती के तौर पर निपटने का आह्वान किया
अमरावती, 20 सितंबर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को अल नीनो की स्थिति से एक चुनौती के तौर पर निपटने का आह्वान किया।
उन्होंने अल नीनो के असर से निपटने के लिए कम समय और मध्यम अवधि की योजनाएं अपनाने का सुझाव दिया।
उन्होंने अल नीनो के असर, स्थिति से निपटने के लिए जरूरी उपायों और कार्य योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, कर्मचारियों और रायथु सेवा केंद्रों के कर्मियों के साथ टेलीकांफ्रेंस की।
उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में बारिश में 50.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बारिश में सबसे ज्यादा कमी प्रकाशम, अन्नमय्या और सत्य साईं जिलों में देखी गई है।
खरीफ सीजन के दौरान 30.84 लाख हेक्टेयर जमीन पर खेती की योजना बनाई गई थी, लेकिन अल नीनो के असर के कारण 79 प्रतिशत जमीन पर खेती का काम शुरू हो पाया है।
हालांकि दालों की खेती संतोषजनक है, लेकिन तिलहन की खेती कम है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे किसानों की मदद करने और कीमतों को काबू में रखने पर ध्यान दें। अधिकारियों को चावल, प्याज, पाम ऑयल और अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि हमने अल-नीनो की स्थिति का पहले ही अंदाजा लगा लिया था। सभी को पहले से तैयार एक्शन प्लान के मुताबिक काम करना चाहिए। अल-नीनो का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि सभी सेक्टर पर पड़ता है। किसानों को अल-नीनो के असर से बचाने की कोशिश करते हुए, कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के उपाय भी किए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने ज्यादा जोखिम वाले आरएसके इलाकों में बागवानी फसलों की मदद के लिए आवंटित फंड का सही इस्तेमाल करने की सलाह दी।
उन्होंने बाजार की मांग के आधार पर फसलें उगाने पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया।
चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि हमने फसल बीमा का इंतजाम किया है। अगर फसल का नुकसान होता है, तो हमें यह पक्का करना होगा कि बीमा का पैसा किसानों तक पहुंचे।
उन्होंने अधिकारियों को चावल के स्टॉक की जांच करने और कीमतों को काबू में रखने के लिए चावल का स्टॉक बाजार में जारी करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि हम अभी प्याज की कीमतों को काबू में रखने के लिए अलग-अलग इलाकों से प्याज खरीद रहे हैं। भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए प्याज की खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। पाम ऑयल और अरहर दाल की कीमतों को काबू में रखने के लिए जो फैसले पहले ही लिए जा चुके हैं, उन्हें तेजी से लागू किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे किचन गार्डन को बढ़ावा दें और यह पक्का करें कि सब्जियां सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (स्वयं-सहायता समूहों) द्वारा चलाए जा रहे किचन गार्डन में उगाई जाएं। उनका मानना है कि इससे सब्जियों की कीमतों को काबू में रखने में मदद मिलेगी।
यह बताते हुए कि केंद्र सरकार कुछ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देती है, उन्होंने अधिकारियों से इस मामले में केंद्र के साथ तालमेल बिठाने को कहा।
उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह यह पक्का करे कि आपदाओं के समय जनता पर बुरा असर न पड़े। ऐसी स्थितियों से बचना चाहिए जिनमें अधिकारियों की लापरवाही की वजह से किसानों और ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़े।
--आईएएनएस
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