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आंध्र प्रदेश ने स्वच्छ ऊर्जा नीति के कार्यान्वयन में तेजी लाई

अमरावती, 21 मई ( आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश ने अपनी एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति को तेजी से लागू करना शुरू कर दिया है। इस नीति के तहत राज्य का लक्ष्य 2029 तक नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, बिजली पारेषण और विनिर्माण क्षेत्रों में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करना है।
 
आंध्र प्रदेश ने स्वच्छ ऊर्जा नीति के कार्यान्वयन में तेजी लाई

अमरावती, 21 मई ( आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश ने अपनी एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति को तेजी से लागू करना शुरू कर दिया है। इस नीति के तहत राज्य का लक्ष्य 2029 तक नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, बिजली पारेषण और विनिर्माण क्षेत्रों में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित करना है।

इस दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, वाईएसआर कडप्पा जिले में 600 मेगावाट के सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं।

एन चंद्रबाबू नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश के लिए यह गर्व की बात है कि ‘एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024’ के तहत पहला प्रोजेक्ट अब शुरू हो रहा है। सरकार आंध्र प्रदेश को भारत की स्वच्छ ऊर्जा राजधानी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मानव संसाधन विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रियल टाइम गवर्नेंस मंत्री नारा लोकेश शुक्रवार को ‘एसएईएल सोलर एमएचपी1’ और ‘एसएईएल सोलर एमएचपी2’ परियोजनाओं का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।

गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, एसएइएल लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश में अपने 600 मेगावाट के सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट रिकॉर्ड 11 महीनों में सफलतापूर्वक शुरू कर दिए हैं। यह उपलब्धि दिखाती है कि आंध्र प्रदेश देश में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो रहा है।

करीब 3,000 करोड़ रुपए के निवेश से तैयार की गई यह एकीकृत सौर ऊर्जा परियोजना 2,400 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। यह हाल के वर्षों में आंध्र प्रदेश में हुए सबसे महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा निवेशों में से एक है।

इन दोनों 300 मेगावाट की परियोजनाओं ने इस वर्ष की शुरुआत में अपना व्यावसायिक संचालन शुरू कर दिया था। एमएचपी1 को 30 जनवरी 2026 को और एमएचपी2 को 13 मार्च 2026 को शुरू किया गया।

इस परियोजना में 12 लाख से अधिक उन्नत टॉपकॉन बाइफेशियल सौर मॉड्यूल लगाए गए हैं। इनमें से अधिकांश मॉड्यूल एसएईएल लिमिटेड की पंजाब और राजस्थान स्थित निर्माण इकाइयों में तैयार किए गए थे।

इन परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाली स्वच्छ ऊर्जा, भारतीय सौर ऊर्जा निगम के साथ 25 साल के बिजली खरीद समझौते के तहत सीधे राष्ट्रीय ग्रिड में भेजी जाएगी।

इन परियोजनाओं से हर साल लगभग 11 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा। निर्माण के दौरान 1,000 से अधिक मजदूर सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से काम में लगे थे, जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत स्थानीय समुदायों से थे।

इस विकास कार्य ने लगभग 25 वर्षों तक चलने वाली व्यवस्थित भूमि पट्टा व्यवस्था के माध्यम से इस क्षेत्र के किसानों के लिए लंबे समय के आर्थिक अवसर भी पैदा किए हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को आय के स्थिर और अनुमानित स्रोत मिले हैं।

--आईएएनएस

एसएचके/एबीएम