बेटे को उपमंत्री का दर्जा मिलने से आनंद मोहन नाखुश! जदयू नेतृत्व पर उठाए सवाल
पटना, 28 मई (आईएएनएस)। बिहार के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन ने एक बार फिर जनता दल (यूनाइटेड) के नेतृत्व पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की है। यह नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब बिहार सरकार ने उनके बेटे और जदयू विधायक चेतन आनंद को उपमंत्री का दर्जा दिया है।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान आनंद मोहन ने कहा कि वह जो भी बयान देते हैं, उसे पूरी सोच-समझकर देते हैं और अपने हर बयान पर कायम रहते हैं। उन्होंने मीडिया के एक वर्ग पर उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा, "मैं सोच-समझकर बोलता हूं और अपने हर बयान पर कायम रहता हूं।"
हाल के दिनों में आनंद मोहन ने जदयू के भीतर कथित तौर पर "थैली की राजनीति" होने का आरोप लगाया था। इस संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हर भौंकने वाले कुत्ते को जवाब देना मैं जरूरी नहीं समझता।"
आनंद मोहन लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि जदयू के कुछ प्रभावशाली नेता पक्षपात और आर्थिक प्रभाव के आधार पर पार्टी पदों तथा मंत्रिपदों का बंटवारा करते हैं।
उन्होंने कहा कि मूलभूत सवालों का सीधा जवाब दिया जाना चाहिए और उन्हें घुमाने या कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आनंद मोहन इस बात से नाराज हैं कि उनके बेटे चेतन आनंद को बिहार मंत्रिमंडल में पूर्ण मंत्री के रूप में शामिल नहीं किया गया।
चेतन आनंद को उपमंत्री का दर्जा दिए जाने पर कटाक्ष करते हुए आनंद मोहन ने कहा, "मैं पहले भी कह चुका हूं कि उपमुख्यमंत्री एक मौन मुख्यमंत्री जैसा होता है। फिर उपमंत्री क्या होता है?"
नई राजनीतिक पार्टी बनाने की संभावनाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा, "समय आने दीजिए, सब बता दूंगा। अभी अपने मन की बात क्यों बताऊं?"
उनके इस बयान के बाद जदयू के भीतर संभावित राजनीतिक पुनर्संरेखण या बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं।
आनंद मोहन ने यह भी दावा किया कि जदयू के कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और वर्षों की मेहनत को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा, "जिन बेईमान लोगों ने नीतीश कुमार की जीवनभर की तपस्या और मेहनत पर पानी फेर दिया है, पार्टी छोड़ने का काम उन्हें करना चाहिए।"
बिना किसी का नाम लिए उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे लोग, जिन्हें पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल होने से पहले ही चुनावी टिकट मिल गए थे, आज संगठन में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि आनंद मोहन के जदयू के वरिष्ठ नेताओं, विशेषकर ललन सिंह और संजय झा के साथ संबंध मधुर नहीं हैं।
मिथिलांचल क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले आनंद मोहन बिहार की राजनीति के एक चर्चित और विवादित नेता रहे हैं। वर्ष 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बाद में वर्ष 2023 में उन्हें रिहा कर दिया गया।
वर्तमान में उनकी पत्नी लवली आनंद लोकसभा सांसद हैं, जबकि उनके बेटे चेतन आनंद जदयू के विधायक हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
