सनातन धर्म को खत्म करना चाहते हैं उदयनिधि, तो मां दुर्गा स्टालिन ने निमिशंबा मंदिर में लगाई हाजिरी
मांड्या, 2 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म के उन्मूलन के आह्वान वाले बयान को लेकर चल रहे विवाद के बीच, उनकी मां दुर्गा स्टालिन ने मैसूर के पास स्थित प्रसिद्ध निमिशंबा मंदिर का दौरा कर अपने पति और बेटे के नाम पर विशेष पूजा-अर्चना की।
मंगलवार को सोशल मीडिया पर दुर्गा स्टालिन की मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए। कई यूजर्स ने उदयनिधि स्टालिन की पहले की टिप्पणियों और परिवार के मंदिर दौरे के बीच के स्पष्ट विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया।
इस दौरे ने राजनीतिक गलियारों में सबका ध्यान खींचा है, क्योंकि सनातन धर्म पर उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों ने देश भर में एक बहस छेड़ दी थी और कई हिंदू संगठनों तथा राजनीतिक दलों की आलोचना का सामना करना पड़ा था।
दुर्गा स्टालिन सोमवार को अपने परिवार के सदस्यों के साथ मांड्या जिले की श्रीरंगपट्टनम तालुका में स्थित गंजम के निमिशंबा मंदिर पहुंचीं। उनके साथ जेडी(एस) विधायक जीटी देवेगौड़ा, उनकी बेटी और दामाद भी थे।
सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा शुभ पूर्णिमा के दिन हुई। दुर्गा स्टालिन ने देवी की पारंपरिक 'उडी सेवा' की और देवी को रेशमी साड़ी, चूड़ियां, फूल, फल और नारियल चढ़ाए।
उन्होंने एमके स्टालिन, उदयनिधि और अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर विशेष पूजा-अर्चना भी करवाई। मंदिर के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने देवी के सामने प्रार्थना करते हुए लगभग 30 मिनट बिताए। ये अनुष्ठान मंदिर के मुख्य पुजारी, सूर्य नारायण भट्ट द्वारा संपन्न कराए गए।
धार्मिक समारोहों में कुमकुमार्चन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और महा मंगला आरती शामिल थे, जिसके बाद भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया गया।
मुख्य मंदिर में पूजा-पाठ की रस्में पूरी करने के बाद दुर्गा स्टालिन ने मंदिर परिसर के भीतर स्थित मौक्तिकेश्वर, लक्ष्मीनारायण स्वामी, सूर्य नारायण स्वामी, गणपति और अंजनेय स्वामी को समर्पित मंदिरों में भी प्रार्थना की। मंदिर के कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने परिसर के भीतर काफी समय बिताया और पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। उनके इस दौरे ने मंदिर में मौजूद भक्तों और दर्शनार्थियों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
गौरतलब है कि उदयनिधि स्टालिन ने एक विवादित बयान देते हुए सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही थी। उनका तर्क था कि यह धर्म भेदभाव और सामाजिक असमानता को बढ़ावा देता है। उनके इस रुख के कारण पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई और उन्हें कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर अपने पहले भाषण में उन्होंने एक बार फिर सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म, जो लोगों को बांटता है, उसे निश्चित रूप से खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि उनका यह रुख जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ है, न कि धार्मिक मान्यताओं या मंदिर में पूजा-पाठ के खिलाफ।
--आईएएनएस
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