सरकारी आईटी बजट का कम से कम 15 प्रतिशत साइबर सुरक्षा पर होना चाहिए खर्च: एस.कृष्णन
नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस.कृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि सरकारी आईटी बजट का कम से कम 15 प्रतिशत साइबर सुरक्षा पर खर्च होना चाहिए। साथ ही कहा कि साइबर सुरक्षा को बाद की प्राथमिकताओं में नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे डिजिटल सिस्टम में डिजाइन के स्तर पर ही शामिल किया जाना चाहिए।
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) द्वारा आयोजित 'साइबरसिक्योरिटी 360 समिट' को संबोधित करते हुए कृष्णन ने कहा कि कोई भी संगठन साइबर जोखिमों को हल्के में नहीं ले सकता और साइबर सुरक्षा के लिए लगातार सतर्कता की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के विकास और उसे लागू करने में 'सिक्योरिटी बाय डिजाइन' एक मुख्य सिद्धांत होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने इंडस्ट्री से साइबर सुरक्षा में सही मात्रा में संसाधन लगाने, घरेलू साइबर सुरक्षा उत्पादों को बढ़ावा देने और सामूहिक सुरक्षा व जानकारी साझा करने को मजबूत करने के लिए साइबर घटनाओं की तुरंत जानकारी 'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम' (सीईआरटी-आईएन) को देने का आग्रह किया।
कृष्णन ने कहा, "जब सरकार आईटी पर खर्च करती है, तो आईटी बजट का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा साइबर सुरक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए।"
इस कार्यक्रम में बोलते हुए, रक्षा मंत्रालय के रक्षा विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक और सलाहकार डॉ. अमित शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) की वैश्विक दौड़ एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है। उन्होंने अत्याधुनिक एआई मॉडल विकसित करने के लिए एक सक्रिय राष्ट्रीय रोडमैप बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अनुसंधान के क्षेत्र में बुनियादी एआई मॉडल बनाने के लिए अपने प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम के तहत पहले ही 'रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन' (आरएफआई) जारी कर दिया है।
शर्मा ने यह भी कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग के आने से पारंपरिक क्रिप्टोग्राफिक सिस्टम आखिरकार बेकार हो जाएंगे, जिससे 'पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी' की ओर बढ़ना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन जाएगी।
सीआईआई साइबर सुरक्षा टास्क फोर्स के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक डॉ. गुलशन राय ने कहा कि 5जी और आने वाले 6जी नेटवर्क जैसी तकनीकों के तेजी से विस्तार ने बड़ी कंपनियों और छोटे व्यवसायों, दोनों के लिए साइबर हमले का दायरा बढ़ा दिया है।
सीआईआई द्वारा केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और सीईआरटी-आईएन की साझेदारी में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया। इसका उद्देश्य बदलते वैश्विक खतरों के बीच भारत की डिजिटल मजबूती को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा करना था।
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