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2017 हत्या मामले में नंदलाल उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक, जमानत मंजूर

प्रयागराज, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की 2017 के हत्या मामले में दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा कि आम आदमी के जीविका के अधिकार का महत्व किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम नहीं है।
 

प्रयागराज, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नंदलाल राय उर्फ ​​बबलू राय की 2017 के हत्या मामले में दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा कि आम आदमी के जीविका के अधिकार का महत्व किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम नहीं है।

राय ने दोषसिद्धि से पहले खुद को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सक्रिय कार्यकर्ता बताया था। उन्‍होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में या संभव होने पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने 5 अक्टूबर को बबलू राय की उस आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें हत्या मामले में दोषी ठहराया गया था और सजा सुनाई गई थी।

अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने कहा कि 2026 में दायर अपील पर निकट भविष्य में सुनवाई होने की संभावना नहीं है और यह माना कि कार्यवाही लंबित रहने के दौरान दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि एक आम आदमी के आजीविका के अधिकार को ध्यान में रखते हुए, जो एक राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है, अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए ताकि वह अपनी उपरोक्त अपील पर अंतिम निर्णय होने तक जीवित रह सके।

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के अफजल अंसारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2024) मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें दोषसिद्धि को निलंबित करने के मापदंड निर्धारित किए गए थे, जिसमें यह भी शामिल था कि क्या ऐसी राहत न देने से अन्याय या अपरिवर्तनीय परिणाम होंगे।

उच्च न्यायालय ने पाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने कई मौकों पर जन प्रतिनिधियों की दोषसिद्धि पर रोक लगाई है, क्योंकि ऐसी दोषसिद्धि का उनकी चुनाव लड़ने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

बबलू राय को राहत देते हुए, उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि उन्हें संबंधित न्यायालय की संतुष्टि के अनुरूप व्यक्तिगत मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किया जाए। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित रहेगी।

हालांकि, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कई अन्य शर्तें भी लगाईं, जिनमें यह निर्देश भी शामिल है कि बबलू राय जमानत पर रहते हुए न्यायालय की अनुमति के बिना अपने नाम पर किसी भी अचल संपत्ति का हस्तांतरण, विक्रय या किसी अन्य प्रकार से हस्तांतरण नहीं कर सकते।

उन्हें रिहाई के एक महीने के भीतर जुर्माने का 50 प्रतिशत जमा करने का भी निर्देश दिया गया, जबकि शेष राशि अपील लंबित रहने तक निलंबित रहेगी।

यह मामला मुखबिर के पिता की हत्या से संबंधित है, जिनकी शाम करीब 7:30 बजे बाजार से घर लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राय के वकील ने अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में उनका नाम नहीं था और एफआईआर दर्ज होने के लगभग 17 दिन बाद ही उनकी कथित संलिप्तता का खुलासा हुआ।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम