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यूपी की फॉरेंसिक व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, रेप-मर्डर केस में देनी पड़ी जमानत

प्रयागराज, 4 जून (आईएएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में फोरेंसिक जांच सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि डीएनए जांच से जुड़ी खामियों और फोरेंसिक लैब (एफएसएल) के कमजोर ढांचे के कारण रेप और हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच और अभियोजन प्रभावित हो रहा है।
 
यूपी की फॉरेंसिक व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, रेप-मर्डर केस में देनी पड़ी जमानत

प्रयागराज, 4 जून (आईएएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में फोरेंसिक जांच सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि डीएनए जांच से जुड़ी खामियों और फोरेंसिक लैब (एफएसएल) के कमजोर ढांचे के कारण रेप और हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच और अभियोजन प्रभावित हो रहा है।

एटा जिले में दर्ज एक कथित रेप और हत्या के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने कहा कि अदालत को मजबूरी में आरोपी को जमानत देनी पड़ रही है क्योंकि फोरेंसिक रिपोर्ट डीएनए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को अपराध से सीधे तौर पर नहीं जोड़ सकी।

यह मामला नवंबर 2025 का है, जब एक महिला का शव नदी के किनारे मिला था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला गोबर फेंकने के लिए घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। शुरुआत में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में कुछ गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी का नाम मामले में जोड़ा गया।

वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी का नाम मूल एफआईआर में नहीं था और बाद में गवाहों के बयानों के जरिए उसे मामले में शामिल किया गया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि खुले मैदान से मृतका की घड़ी बरामद होना उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं माना जा सकता।

आरोपी की ओर से यह भी कहा गया कि एफएसएल रिपोर्ट रेप के आरोप की पुष्टि नहीं करती क्योंकि आरोपी का डीएनए प्रोफाइल मृतका के नमूने (वजाइनल स्वैब) से मिले डीएनए से मेल नहीं खाता।

जमानत याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे कई मामले अदालत के सामने आ चुके हैं, जिनमें रेप के बाद हत्या का आरोप था। अदालत ने कहा कि कई मामलों में आरोपी का डीएनए और पीड़िता के नमूने जांच के लिए एफएसएल भेजे गए, लेकिन अधूरा डीएनए प्रोफाइल तैयार होने के कारण यह तय नहीं हो पाया कि नमूनों में मिला डीएनए किसका था।

न्यायमूर्ति देशवाल ने कहा, "यह मामला भी एक गंभीर अपराध से जुड़ा है, जिसमें महिला के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्य न होने के कारण अदालत को भारी मन और पीड़ा के साथ आरोपी को जमानत देनी पड़ रही है।"

अदालत ने कहा कि पूरा डीएनए प्रोफाइल तैयार न हो पाना जांच प्रक्रिया और एफएसएल की सुविधाओं में बड़ी कमी को दर्शाता है।

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें उत्तर प्रदेश एफएसएल के निदेशक ने अदालत को बताया था कि राज्य की कई फोरेंसिक प्रयोगशालाएं कर्मचारियों की कमी और आधुनिक डीएनए जांच उपकरणों के अभाव से जूझ रही हैं।

अदालत ने कहा कि पुरानी मशीनें और अपर्याप्त आधारभूत ढांचा डीएनए जांच को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे आपराधिक मामलों में न्याय प्रक्रिया पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस स्थिति के लिए राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है और उसे फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में आधुनिक मशीनें तथा पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।

अदालत ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश दिया कि इस फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजी जाए, ताकि इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जा सके।

जमानत देते समय अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह नवंबर 2025 से जेल में बंद है। साथ ही स्पष्ट किया कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत सुनवाई तक सीमित हैं और मुकदमे की अंतिम सुनवाई को प्रभावित नहीं करेंगी।

--आईएएनएस

एएमटी/पीएम