दिल्ली हाई कोर्ट ने अल-फलाह ट्रस्ट केस में जवाद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिकाएं ट्रांसफर कीं
नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को अल-फलाह ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी की दो अंतरिम जमानत याचिकाओं को जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच को ट्रांसफर करने का आदेश दिया। जस्टिस बनर्जी के पास ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामलों में से एक में उनकी रेगुलर जमानत याचिका भी पेंडिंग है।
ईडी के दो अलग-अलग मामलों से जुड़ी अंतरिम जमानत की अर्जियां जस्टिस मनोज जैन और जस्टिस मधु जैन की बेंच के सामने लिस्ट की गई थीं।
सिद्दीकी की ओर से पेश वकील ने दोनों मामलों को जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि ईडी के एक मामले में रेगुलर जमानत की अर्जी भी बुधवार को उसी जज के सामने लिस्ट की गई थी।
दोनों बेंचों ने यह अनुरोध मान लिया और अब अंतरिम जमानत की अर्जियां जस्टिस सौरभ बनर्जी के पास ट्रांसफर कर दी गई हैं। इन मामलों पर गुरुवार को सुनवाई होनी है।
सिद्दीकी ने इस आधार पर अंतरिम जमानत मांगी है कि उनकी पत्नी उस्मा अख्तर का कैंसर का इलाज चल रहा है और इलाज के दौरान उन्हें उनकी देखभाल और सहारे की जरूरत है।
इसके अलावा, जस्टिस सौरभ बनर्जी ने सिद्दीकी की रेगुलर जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए 29 और 30 जुलाई को शाम 4 बजे का समय तय किया। सिद्दीकी की ओर से वकील विश्वेंद्र तोमर, तालिब मुस्तफा और अभिषेक सिंह पेश हुए।
पिछले महीने, दिल्ली हाई कोर्ट ने सिद्दीकी की उस याचिका पर ईडी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अस्थायी रिहाई की मांग को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद, जब केंद्रीय एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग एजेंसी ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी, तो सुनवाई टाल दी गई।
सिद्दीकी की ओर से पेश सीनियर वकील विक्रम चौधरी ने दलील दी थी कि अख्तर का स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर का इलाज चल रहा है और सिद्दीकी ही उनकी मुख्य देखभाल करने वाले हैं।
छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगते हुए, सिद्दीकी ने कहा था कि इलाज के मौजूदा दौर में उन्हें अपनी पत्नी के साथ रहने की जरूरत है। याचिका का विरोध करते हुए, ईडी ने तर्क दिया था कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और अंतरिम जमानत देने का विरोध किया।
इससे पहले, साकेत कोर्ट के एक एडिशनल सेशंस जज ने सिद्दीकी की पत्नी के मेडिकल रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों की जांच करने के बाद उनकी अंतरिम जमानत की अर्जियां खारिज कर दी थीं।
9 जून को पारित अपने आदेश में, स्पेशल कोर्ट ने कहा कि हालांकि यह निर्विवाद है कि अख्तर स्टेज-4 कैंसर से पीड़ित हैं, लेकिन कोर्ट के सामने रखे गए मेडिकल रिकॉर्ड से ऐसी कोई तत्काल जानलेवा स्थिति या इमरजेंसी का पता नहीं चलता जिसके लिए अंतरिम जमानत दी जाए।
कोर्ट ने कहा कि मेडिकल दस्तावेजों में उनकी बीमारी को 'स्टेबल' (स्थिर) बताया गया है और 'इलाज पर अच्छा रिस्पॉन्स' दर्ज किया गया है। स्पेशल कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सिद्दीकी यह साबित नहीं कर पाए कि उनकी पत्नी किसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं, अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां खुद नहीं कर सकती थीं, या उनकी देखभाल के लिए कोई दूसरा व्यक्ति उपलब्ध नहीं था।
ईडी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर पर आधारित है। इन एफआईआर में अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संस्थाओं के कामकाज में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है।
ईडी का आरोप है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने एनएएसी की एक्सपायर हो चुकी मान्यता को वैध बताया और ऐसी यूजीसी मान्यता का दावा किया जो असल में थी ही नहीं। साथ ही, यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज पर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से मंजूरी पाने के लिए गड़बड़ी करने का भी आरोप है।
केंद्रीय वित्तीय एजेंसी का दावा है कि जांच में पता चला है कि 2016-17 और 2024-25 के बीच 493.24 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (अपराध से प्राप्त धन) हुई थी। आरोप है कि इस पैसे को सिद्दीकी और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी संस्थाओं के जरिए दूसरी जगहों पर भेजा गया।
इससे पहले इस साल, जांच के तहत ईडी ने अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और सिद्दीकी की 39.45 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी की 144 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत वाली जमीन और इमारतें भी जब्त की गई थीं।
--आईएएनएस
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